नयी दिल्ली , अप्रैल 29 -- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अपना 'पेरेंटिंग कैलेंडर' जारी किया।
यह पहल अभिभावकों और स्कूलों के बीच व्यवस्थित जुड़ाव को मजबूत करने और छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गयी है।
यहां जारी एक परिपत्र में सीबीएसई के सचिव हिमांशु गुप्ता ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन के अनुरूप है, जो शिक्षा के प्रति सहयोगात्मक और समावेशी दृष्टिकोण पर जोर देती है। शुरुआत में 2025-26 में पेश किये गये पेरेंटिंग कैलेंडर को स्कूलों, अभिभावकों और शिक्षाविदों से व्यापक समर्थन मिला था, जिसने वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता को और पुख्ता किया है। इसी सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए, 2026-27 के संस्करण का लक्ष्य अभिभावकों और स्कूलों के बीच नियमित और सार्थक बातचीत को एक संस्थागत रूप देना है। इसमें बेहतर रणनीतियों और व्यवस्थित ढांचे को शामिल किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अभिभावकों की भागीदारी केवल नियमित बैठकों तक सीमित न रहे, बल्कि सीखने के परिवेश का अभिन्न हिस्सा बन जाये।
श्री गुप्ता ने बताया कि अद्यतन कैलेंडर में कई नये घटक शामिल किये गये हैं, जो परिवारों और छात्रों के सामने आने वाली समकालीन चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार किये गये हैं। इनमें 'समावेश' पर समर्पित खंड शामिल हैं, जो विविध प्रकार के सीखने वालों के लिए जागरूकता और न्यायसंगत प्रथाओं को बढ़ावा देते हैं। साथ ही इसमें शैक्षणिक और पाठ्यचर्या संबंधी बदलावों से तालमेल बिठाने के लिए मार्गदर्शन भी दिया गया है। यह ढांचा मनोवैज्ञानिक-सामाजिक कल्याण पर भी अधिक जोर देता है, जो छात्रों को शैक्षणिक मांगों के साथ-साथ भावनात्मक और सामाजिक दबावों से निपटने में मदद करने के लिए व्यवस्थित सहायता प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि अभिभावक कार्यशालाओं में महत्वपूर्ण सुधार किया गया है, जो अब विकासवादी दृष्टिकोण को अपनाते हैं। यह स्कूलों को आयु वर्ग और प्रासंगिक आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रमों को तैयार करने में सक्षम बनाता है, जिससे संवाद अधिक सटीक और प्रभावशाली हो जाता है। स्कूल समुदाय के भीतर निरंतर भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए इसमें शिक्षकों के नेतृत्व वाली गतिविधियों और विशेष रूप से तैयार किये गये मॉड्यूल्स की शृंखला भी शामिल की गयी है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस कैलेंडर को केवल गतिविधियों की एक समय-सारणी के रूप में नहीं, बल्कि अभिभावकों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के तौर पर तैयार किया गया है। यह चिंतनशील अभ्यासों को प्रोत्साहित करता है, माता-पिता और बच्चों के बीच सार्थक बातचीत को बढ़ावा देता है और बच्चे के विकास में जिम्मेदारी की एक साझा भावना विकसित करता है। इसमें अनुकूलन क्षमता और निरंतर सुधार सुनिश्चित करने के लिए फीडबैक और चिंतन के लिए समर्पित स्थान भी दिये गये हैं।
इस पहल के तहत व्यवस्थित और आवश्यकता-आधारित अभिभावक-शिक्षक संवाद की शुरुआत की गयी है, जिससे छात्रों की प्रगति और चुनौतियों पर समय रहते बातचीत की जा सकेगी। स्कूलों को शैक्षणिक परिवेश में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी के अवसर पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिससे आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूती मिले।
सीबीएसई के अनुसार इस कैलेंडर का प्रभावी कार्यान्वयन स्कूलों को अभिभावकों के साथ मजबूत साझेदारी बनाने, छात्रों की जरूरतों पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने और शिक्षा प्रणाली के भीतर एक सहायक समुदाय विकसित करने में मदद कर सकता है। इस दृष्टिकोण का लक्ष्य उभरती हुई शिक्षण पद्धतियों के अनुरूप शैक्षणिक प्रगति के साथ भावनात्मक लचीलेपन और सामाजिक विकास के बीच संतुलन बनाना है।
।कार्यक्रम में स्कूलों के प्राचार्यों, शिक्षकों, परामर्शदाताओं, वैलनेस एजुकेटर्स और अभिभावकों ने हिस्सा लिया।
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