नयी दिल्ली , जुलाई 09 -- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को महादेव ऐप सट्टेबाजी गिरोह के सिलसिले में 11 आरोपपत्र दाखिल किये जिनमें कथित भ्रष्टाचार के मामले में छह और अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े एक अलग मामले में पांच आरोपपत्र शामिल हैं।

एजेंसी ने भ्रष्टाचार के मामले में असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छपरिया, अनिल धम्मानी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा के खिलाफ 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' के प्रावधानों के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के अपराधों के लिए छह आरोपपत्र दाखिल किये। सीबीआई ने गिरोह के कथित मुख्य सरगनाओं, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ अतिरिक्त सबूत भी पेश किए, जिनके खिलाफ पहले ही आरोपपत्र दाखिल किये जा चुके थें। महादेव ऐप से जुड़े दूसरे मामले में, एजेंसी ने 66 आरोपियों के खिलाफ पांच आरोपपत्र दाखिल किये। इनमें चंद्राकर, उप्पल और विभिन्न सट्टेबाजी गिरोह पैनल के सदस्य शामिल हैं, जिनके ज़रिए कथित तौर पर अपराध से हुई कमाई का लेन-देन किया गया था। इन आरोपपत्र में आईपीसी और 'छत्तीसगढ़ जुआ निषेध अधिनियम' के प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया है।

सीबीआई के अनुसार, महादेव ऐप भारत में सामने आए सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह में से एक है। जांच से पता चला है कि इस नेटवर्क को देश के बाहर से इसके प्रमोटरों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल द्वारा चलाया जा रहा था। उन्होंने कथित तौर पर इस प्लेटफ़ॉर्म को देशव्यापी सट्टेबाजी अभियान के रूप में फैलाया और सोशल मीडिया के ज़रिए लाखों यूज़र्स तक इसकी पहुँच बनायी।

एजेंसी का आरोप है कि यह गिरोह देश भर में गैर-कानूनी सट्टेबाजी के पैनल चलाता था, उपभोक्ताओं को जोड़ता था, सट्टेबाजी का काम करता था और भारी गैर-कानूनी मुनाफ़ा कमाता था। आरोप है कि इस पैसे को विदेश भेजने से पहले 'धन राशि का हेरफेर करने के लिए खोले गये अवैध खातों' में डाला जाता था। इस गैर-कानूनी पैसे का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों को 'संरक्षण राशि ' के तौर पर दिया जाता था।

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