नयी दिल्ली , अक्टूबर 12 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की आधिकारिक यात्रा में भारत-सिंगापुर आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से कई उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें हुईं और उन्होंने वहां प्रमुख वैश्विक निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और व्यापारिक संधों के साथ भी बैठकों में भारत में निवेश के बढ़ते अवसरों की जानकारी दी।

इस यात्रा के दौरान, केंद्रीय वित्त मंत्री ने सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम और प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात की। इस दौरान उप-प्रधानमंत्री और व्यापार एवं उद्योग मंत्री गन किम योंग तथा विदेश मंत्री महामहिम डॉ. विवियन बालाकृष्णन से भी मुलाकात की।

इन बैठकों से भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक के नतीजों को आगे बढ़ाने में हुई प्रगति की समीक्षा करने और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर विचार करने का अवसर मिला। दोनों पक्षों ने भारत-आसियान सहयोग और क्षेत्रीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें 2027 में सिंगापुर की आसियान अध्यक्षता की तैयारी भी शामिल थी।

वित्त मंत्री ने राष्ट्रपति शनमुगरत्नम और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा द्वारा दोपहर के भोजन पर आयोजित बैठक में भी भाग लिया। इस बैठक में वैश्विक वित्तीय संस्थानों, निवेश फर्मों, शिक्षा जगत और सिंगापुर सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया, जिससे वैश्विक आर्थिक और वित्तीय घटनाक्रमों पर चर्चा करने का अवसर मिला।

सिंगापुर के नेतृत्व के साथ हुई चर्चाओं में द्विपक्षीय निवेश को बढ़ाने, वित्तीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने और उभरती हुई तकनीकों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री ने भारत के मजबूत व्यापक आर्थिक आधार, विकास की संभावनाओं और चल रहे नीतिगत सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सिंगापुर स्थित संस्थागत निवेशकों और व्यवसायों को भारत की विकास यात्रा में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। निवेशकों के विचार के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड पाइपलाइन से कुछ खास इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को दिखाया गया, ताकि संबंधित भारतीय अधिकारियों के साथ आगे की बातचीत और जुड़ाव को आसान बनाया जा सके।

वित्त मंत्री ने विश्व की बड़ी वित्तीय कंपनियों और निवेश फर्मों के सीनियर प्रतिनिधियों के साथ एक गोलमेज चर्चा में हिस्सा लिया। इनमें जेपी मॉर्गन चेस, ब्लैकरॉक, डॉयचे बैंक, पिमको, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी , कार्लाइल, टेमासेक, मिलेनियम मैनेजमेंट, सिटाडेल और ब्रेवन हॉवर्ड शामिल थे। वित्त मंत्री ने बड़े संस्थागत निवेशकों, फाइनेंशियल संस्थाओं और ग्लोबल कंपनियों के सीनियर लीडर्स के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इनमें मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप , सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन , वेलिंगटन मैनेजमेंट, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, जीआईसी (गवर्नमेंट ऑफ़ सिंगापुर इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन), डीबीएस बैंक, स्कैंडिनेवियास्का एन्स्किल्डा बैंकन , टेमासेक, टीपीजी, एचपीएस इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स, कैपिटालैंड इन्वेस्टमेंट, इंटेल, ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट , आईएचएच हेल्थकेयर और बी कैपिटल शामिल थे।

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