बड़वानी , जून 16 -- मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से संक्रमित दो माह की मादा तेंदुआ शावक की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। घटना के बाद वन विभाग ने वन्यजीवों में संक्रमण की रोकथाम, निगरानी और शीघ्र पहचान के संबंध में एडवाइजरी जारी की है।

वन मंडलाधिकारी आशीष बंसोड़ ने बताया कि शावक की मृत्यु महू स्थित पशु चिकित्सा महाविद्यालय में उपचार के दौरान हुई। पोस्टमार्टम के बाद निर्धारित वन्यजीव प्रोटोकॉल के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि आठ जून को राजपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम गोलाटा स्थित एक खेत से मादा शावक का रेस्क्यू किया गया था। शावक को उसकी मां से मिलाने के उद्देश्य से लगातार तीन रात तक उसी क्षेत्र में रखा गया, लेकिन मादा तेंदुआ वापस नहीं लौटी।

इस दौरान शावक में सीडीवी संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लगे, जिसके बाद पुनर्मिलन की प्रक्रिया रोककर उसका उपचार शुरू किया गया। हालत बिगड़ने पर उसे महू स्थित पशु चिकित्सा महाविद्यालय भेजा गया, जहां आज उसकी मृत्यु हो गई।

श्री बंसोड़ ने बताया कि वन विभाग की टीमें थर्मल ड्रोन और अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद से शावक की मां तथा उसके दो अन्य शावकों की तलाश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अब तक क्षेत्र में न तो उनके शिकार करने की कोई सूचना मिली है और न ही ग्रामीणों ने उन्हें देखा है। इससे संभावना है कि मादा तेंदुआ अपने अन्य शावकों के साथ काफी दूर चली गई है।

उन्होंने कहा कि मादा तेंदुआ और अन्य दोनों शावकों के सीडीवी से संक्रमित होने की संभावना कम प्रतीत होती है। आशंका है कि मृत शावक किसी संक्रमित जानवर के संपर्क में आ गया होगा, जिससे उसमें संक्रमण फैल गया। यह भी संभव है कि बीमारी के लक्षण दिखने के बाद मादा तेंदुआ ने उसे छोड़ दिया हो अथवा वह परिवार से बिछड़ गया हो।

वन विभाग ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा मध्यप्रदेश वन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एडवाइजरी जारी करते हुए पशु चिकित्सा विभाग को सीडीवी एवं अन्य संक्रामक रोगों की निगरानी बढ़ाने, शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने तथा आवश्यक उपचारात्मक और रोकथाम संबंधी उपाय करने के निर्देश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से कुत्तों में पाई जाती है, लेकिन तेंदुए, बाघ तथा अन्य मांसाहारी वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। वन विभाग ने संभावित संक्रमण की रोकथाम के लिए वन एवं पशु चिकित्सा विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया है।

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