बेंगलुरु , अगस्त 11 -- कावेरी जल प्रबंधन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने कर्नाटक को अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए रोजाना 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है।
सीडब्ल्यूआरसी के मंगलवार को जारी इस आदेश के बाद दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल विवाद और गहरा गया है।
सीडब्ल्यूआरसी अध्यक्ष विनीत गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्देश जारी किया गया है। यह आदेश ऐसे समय आया है, जब कुछ ही दिन पहले तमिलनाडु ने कर्नाटक पर पानी छोड़ने के पुराने निर्देश का पालन न करने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय में भी कानूनी दबाव लगातार बढ़ रहा है।
गत 28 जुलाई के पुराने निर्देश की तुलना में नये आदेश में पानी की मात्रा काफी बढ़ा दी गयी है। तब सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों के लिए बिलिगुंडलू में रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी का बहाव सुनिश्चित करने को कहा था। बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने भी इस निर्देश का समर्थन किया और कर्नाटक को इसका पालन करने को कहा था। तमिलनाडु ने हालांकि शिकायत की थी कि कर्नाटक तय मात्रा में पानी छोड़ने में नाकाम रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार कर्नाटक की ओर से जारी आंकड़ों से पता चला है कि 29 जुलाई से दो अगस्त के बीच बिलिगुंडलू में पानी का बहाव महज 158 क्यूसेक से 550 क्यूसेक के बीच ही सिमटा रहा।
यह नया आदेश बेहद संवेदनशील मोड़ पर आया है, क्योंकि कावेरी मुद्दे पर चर्चा के लिए मंगलवार को ही सीडब्ल्यूएमए की बैठक भी प्रस्तावित है। यह मामला अब उच्चतम न्यायालय भी पहुंच चुका है। शीर्ष न्यायालय सोमवार को तमिलनाडु की उस याचिका पर 13 अगस्त को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गयी, जिसमें कावेरी के हिस्से का पानी तुरंत छोड़ने की मांग की गयी है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तमिलनाडु की इस दलील को दर्ज किया कि कम बारिश की स्थिति के बावजूद कर्नाटक उसके हिस्से का पानी नहीं जारी कर रहा है। इस पीठ में मुख्य न्यायधीश के अलावा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थीं।
तमिलनाडु ने तीन अगस्त को उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। राज्य का तर्क था कि सीडब्ल्यूआरसी ने जो पानी की मात्रा तय की है और जो पानी कर्नाटक ने छोड़ा है, दोनों ही बेहद अपर्याप्त हैं। ऐसे में सीडब्ल्यूआरसी का यह नया निर्देश कर्नाटक पर पानी छोड़ने का दबाव बनायेगा। कर्नाटक हालांकि खुद भी अपने जलाशयों के जलस्तर, बारिश की कमी और पानी की उपलब्धता को लेकर चिंतित है।
सीडब्ल्यूएमए की आगामी बैठक और उच्चतम न्यायालय में होने वाली सुनवाई के मद्देनजर कावेरी विवाद एक बार फिर दोनों राज्यों के बीच नये टकराव की ओर बढ़ रहा है। पानी छोड़ने की मांग, कानूनी आदेश और राजनीतिक रुख अब नाजुक मोड़ पर आ खड़े हुए हैं।
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