रायपुर , सितंबर 12 -- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) घोटाला मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के अपर कलेक्टर चेतन बोरघारिया को शुक्रवार को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें छह दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया।

शनिवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार ईडी ने अदालत को बताया कि मामले में आरोपी कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर और चेतन बोरघारिया के बीच हुई वॉट्सऐप चैट जांच के दौरान जानकारी मिली। एजेंसी ने इसी आधार पर उनसे पूछताछ के लिए रिमांड मांगी थी। अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए चेतन बोरघारिया की छह दिन की रिमांड मंजूर की। चेतन बोरघरिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी के रूप में काम कर चुके हैं।

इससे पहले ईडी ने धमतरी और बलरामपुर में कार्रवाई की थी। धमतरी में चेतन बोरघरिया के अमलतास पुरम स्थित घर पर टीम ने छापा मारा था, जबकि बलरामपुर में भी उनसे पूछताछ की गई थी।

सीजीपीएससी मामले में गिरफ्तार कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को छह दिन पहले अदालत में पेश किया गया था। ईडी ने उसकी रिमांड आगे बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं दिया, जिसके बाद अदालत ने उत्कर्ष को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

जांच में अभ्यर्थियों को परीक्षा के पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपए लेने के आरोप भी सामने आए हैं। ईडी के वकील सौरभ पांडेय के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका अभ्यर्थियों तक प्रीलिम्स और मेन्स के पेपर पहुंचाने से जुड़ी थी।

जांच एजेंसी के आरोपों के अनुसार, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का कथित नेटवर्क तैयार किया था। अभ्यर्थियों को परीक्षा के अलग-अलग चरणों में मदद तथा प्री परीक्षा से इंटरव्यू तक सफलता की गारंटी देने का दावा किया जाता था। इसके एवज में अभ्यर्थी से तीन करोड़ रुपए से अधिक रकम वसूले जाने का आरोप है।

ईडी का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थी से पैसे जुटाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक और अपने मामा के.के. चंद्रवंशी के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ रहे ओएसडी के नाम और प्रभाव का भी इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को प्रभावित करने की बात जांच में सामने आई है।

सीजीपीएससी का यह मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया। योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर नजदीकी लोगों को चयनित कराने के आरोप लगे थे।

राज्य सरकार ने मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी थी। जांच के दौरान एजेंसी ने कई स्थानों पर छापेमारी कर दस्तावेज और अन्य साक्ष्य बरामद किए हैं। मामले में सीबीआई तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

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