रायपुर , सितंबर 01 -- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को राज्य में सात ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पीए रहे केके चंद्रवंशी, पूर्व ओएसडी चेतन बोरघारिया और पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत से जुड़े परिसर शामिल हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ईडी की टीम सुबह करीब छह बजे दो-तीन वाहनों से भिलाई स्थित केके चंद्रवंशी के आवास पहुंची और दस्तावेजों तथा अन्य सामग्री की जांच शुरू की। आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है।
दुर्ग के सिकोला भाठा की बंगाली कॉलोनी स्थित कमलेश सिंह राजपूत के आवास पर करीब आठ अधिकारियों की टीम दो वाहनों से पहुंची। पटवारी संघ के प्रदेश पदाधिकारी रह चुके राजपूत के परिवार के सदस्यों की सरकारी नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल किए जाने की सूचना है। उनकी दो बेटियां पटवारी, एक बेटी उपपंजीयक और बेटा नायब तहसीलदार हैं।
इन नियुक्तियों में किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। छापेमारी अथवा दस्तावेजों की जांच मात्र से संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप सिद्ध नहीं होते हैं। ईडी की ओर से मौजूदा कार्रवाई में केके चंद्रवंशी, चेतन बोरघारिया अथवा कमलेश सिंह राजपूत की कानूनी स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान फिलहाल सामने नहीं आया है।
पूर्व मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे चेतन बोरघारिया के दो ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई है। वर्तमान में बलरामपुर के अपर कलेक्टर बोरघारिया से बलरामपुर सर्किट हाउस में पूछताछ किए जाने की सूचना है, जबकि धमतरी के अमलतास पुरम स्थित उनके आवास पर दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
ईडी की मौजूदा कार्रवाई सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के खिलाफ चल रही धनशोधन जांच की अगली कड़ी मानी जा रही है। सोनवानी को 25 जुलाई को प्रश्नपत्र लीक से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। ईडी की जांच 2024 में सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर पर आधारित है और 2020 तथा 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक एवं चयन संबंधी अनियमितताओं से जुड़ी है।
ईडी का आरोप है कि सोनवानी ने कथित रूप से प्रश्नपत्र लीक कराने और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने में भूमिका निभाई तथा इसके बदले रिश्वत का लेन-देन हुआ। एजेंसी इस कथित लेन-देन और उससे कुछ उम्मीदवारों तथा रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाए जाने के पहलुओं की जांच कर रही है। आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है।
इससे पहले सीबीआई ने सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए अवैध लेन-देन का आरोप लगाया है।
सीबीआई के अनुसार सोनवानी के कार्यकाल में हुई भर्तियों में उनके करीबी रिश्तेदारों तथा कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के 18 रिश्तेदारों के चयन की जांच की गई है। एजेंसी का आरोप है कि सोनवानी ने परीक्षा के प्रश्नपत्र अपने घर पर साहिल, नीतेश, उसकी पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को दिए थे।
सीबीआई का यह भी आरोप है कि तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को दिया और उनके बेटे शशांक तथा बहू भूमिका ने इसके आधार पर तैयारी की। दोनों का बाद में डिप्टी कलेक्टर पद पर चयन हुआ। ये आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और सोनवानी फिलहाल जेल में बंद हैं।
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