बिलासपुर/रायपुर , अगस्त 06 -- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी सीजीपीएससी परीक्षा 2021 के कथित घोटाला मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व सचिव और रिटायर्ड आइएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। जिसकी जानकारी वकीलों ने आज मीडिया को दी ।
न्यायमूर्ति बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने बीते दिन बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक करना हत्या से भी बड़ा अपराध है। अदालत ने टिप्पणी की कि हत्या से केवल एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने से पूरे समाज और लाखों युवाओं का भरोसा टूटता है।
सीबीआई की जांच के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच जब सीजीपीएससी की राज्य सेवा परीक्षा आयोजित की जा रही थी, उस दौरान जीवन किशोर ध्रुव आयोग के सचिव पद पर थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव को उपलब्ध कराए।
सीबीआई के मुताबिक, जांच के दौरान जीवन किशोर ध्रुव के भिलाई स्थित आवास से मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों और उत्तरों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि मुख्य परीक्षा के पेपर नंबर-7 के 47 प्रश्नों में से 42 प्रश्न आरोपी के घर से मिले दस्तावेजों से मेल खाते हैं।
आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक का लाभ मिलने के बाद सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ।
वहीं, जमानत के लिए बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया था कि जीवन किशोर ध्रुव ने पहले ही आयोग को अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी दे दी थी और वह गोपनीय कार्यों से अलग रहे। इसके अलावा सेवानिवृत्ति, लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रहने और समानता के आधार पर जमानत दिए जाने की मांग की गई थी।
हालांकि हाई कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने वाले अधिकारी उन लाखों युवाओं की मेहनत और सपनों के साथ विश्वासघात करते हैं, जो वर्षों तक तैयारी करते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित