पटना, अगस्त 31 -- िहार की राजधानी पटना की एक विशेष अदालत ने केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं (सीजीएचएस) के पटना स्थित अपर निदेशक कार्यालय के एक अधीक्षक और एक लिपिक को रिश्वत लेने के जुर्म में सोमवार को तीन-तीन वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ तीस-तीस हजार रूपयों का जुर्माना भी किया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने मामले में सुनवाई के बाद सीजीएचएस, अपर निदेशक कार्यालय, पटना के पूर्व कार्यालय अधीक्षक गोपीनाथ भगत और निम्न वर्गीय लिपिक देवेंद्र कुमार पाठक को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं में दोषी करार देने के बाद यह सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर दोषियों को तीन-तीन माह के कारावास की सजा अलग से भुगतनी होगी। सीबीआई की ओर से वरीय विशेष लोक अभियोजक श्रीमती शशि विश्वकर्मा ने बहस की थी।
आरोप के अनुसार सीबीआई के अधिकारियों ने 18 मार्च 2013 को दोनों दोषियों को एक दवा आपूर्तिकर्ता से उसके 20 लाख रूपयों का बिल पास करने के एवज में तीन-तीन हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ़्तार किया था। अभियोजन ने इस मामले में आरोप साबित करने के लिए 15 गवाहों का बयान अदालत में कलम बंद करवाया था।
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