फगवाड़ा , मार्च 20 -- खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने शुक्रवार को विदेश मंत्रीजयशंकर को औपचारिक पत्र लिखकर ओमान के एक शेल्टर होम (आश्रय गृह) में रह रही 88 भारतीय महिलाओं और दुबई में फंसे एक अन्य भारतीय नागरिक की तत्काल और सुरक्षित वापसी के लिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है।
श्री सीचेवाल ने अपने पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला कि इनमें से कई महिलाएं अपने परिवारों की मदद के लिए रोजगार की तलाश में खाड़ी देशों में गयीं थी, लेकिन कथित तौर पर धोखाधड़ी करने वाले ट्रैवल एजेंटों का शिकार बन गयीं। उन्होंने बताया कि कई महिलाओं ने अपनी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर किये जाने, मानसिक उत्पीड़न और कुछ मामलों में शारीरिक शोषण की शिकायत की है। जब ये महिलाएं भारत लौटने की कोशिश करती हैं, तो उन्हें धमकियों, झूठे कानूनी मामलों या भारी भरकम रकम की मांग का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। फरवरी के अंत से ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच सैन्य गतिविधियों की खबरों ने भारत में रह रहे परिवारों के बीच डर पैदा कर दिया है। ओमान में हाल ही में हुए एक मिसाइल हमले में, जिसमें कथित तौर पर दो भारतीय नागरिकों की जान चली गयी, ने निकासी प्रयासों की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, शेल्टर होम के भीतर भी डर और अनिश्चितता का माहौल है।
श्री सीचेवाल ने कहा कि ये महिलाएं पिछले कई महीनों से ओमान के शेल्टर होम में रह रही हैं और स्थिति बिगड़ने से पहले ही उनकी वापसी हो जानी चाहिए थी। उन्होंने राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा दिये गये जवाब का भी हवाला दिया, जिसमें ओमान के 'वन स्टॉप सेंटर' में 88 और दुबई में एक महिला की मौजूदगी की पुष्टि की गयी थी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में ओमान, कुवैत, कतर, इराक, बहरीन, सऊदी अरब और यूएई सहित खाड़ी देशों से 10,500 से अधिक भारतीय महिलाओं को सुरक्षित वापस लाया गया है। इनमें ओमान और कुवैत से सबसे अधिक मामले सामने आये हैं।
श्री मुक्तसर साहिब की एक महिला अपने बच्चे की मृत्यु (ब्लड कैंसर के कारण) के बावजूद घर नहीं लौट सकी। तरनतारन की एक अन्य महिला अपने पति के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाई। दोनों मामलों में, एजेंटों द्वारा कथित तौर पर की गयी पैसों की मांग ने उनकी वापसी को रोक दिया, जिससे परिवारों को उनकी अनुपस्थिति में ही अंतिम संस्कार करना पड़ा।
इस मामले को मानवीय और शासन संबंधी चिंता बताते हुए, श्री सीचेवाल ने सरकार से तेजी से और निर्णायक रूप से कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए, विशेष रूप से क्षेत्रीय संघर्ष के समय में। साथ ही, उन्होंनेअवैध भर्ती नेटवर्क के माध्यम से होने वाले शोषण को रोकने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र की मांग की।
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