जयपुर , अप्रैल 21 -- राजस्थान के सीकर जिले के श्रीमाधोपुर में दो बहनों के बाल विवाह को अदालती आदेश के जरिए रोक दिया गया है।

जिले के श्रीमाधोपुर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने परिजनों को अदालत में तलब किया और निषेधाज्ञा जारी कर इस बाल विवाह को रोकने का आदेश दिया। इसके बाद दोनों बहनों का बाल विवाह रोक दिया गया।

बाल विवाह की रोकथाम के लिए काम कर रहे नागरिक समाज संगठन गायत्री सेवा संस्थान को इन दोनों बहनों के बाल विवाह की तैयारी करने की सूचना मिलने पर संस्थान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं श्रीमाधोपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। बालिकाओं के परिजनों को बाल विवाह के कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए उन्हें समझाया गया और इस विवाह को रोकने के लिए नोटिस दिया गया।

पुलिस एवं प्रशासनिक टीम के मौके से लौटने के बाद बालिकाओं के परिजन कानून को धता बता कर गुपचुपतरीके से विवाह के प्रयास में जुटे रहे। अक्षय तृतीया के दिन 19 अप्रैल को सूचना मिली कि दोनों बालिकाओं का बाल विवाह होने जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अगले दिन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बाल अधिकारिता विभाग के सहयोग से अदालत में अर्जी दी गयी, जिस पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटने परिजनों को अदालत में तलब किया और निषेधाज्ञा जारी कर इस बाल विवाह को रोकने का आदेश दिया। दोनों बालिकाओं की उम्र 15 एवं 17 साल है और वे स्थानीय विद्यालय में पढ़ रही हैं। इस पूरी कार्रवाई में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. शालिनी गोयल, सीताराम जाखड़, बाल अधिकारिता विभाग से सहायक उपनिदेशक डॉ. गार्गी शर्मा, गायत्री सेवा संस्थान से नरेश कुमार सैनी, अभिषेक बगड़िया, चाइल्ड हेल्पलाइन से राकेश कुमार, राहुल दानोदिया और श्रीमाधोपुर थाना पुलिस टीम सक्रिय रूप से शामिल रही।

बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठन गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक एवं राजस्थान बाल आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने कहा कि यह आदेश जिले में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए) 2006 के तहत पहली न्यायिक निषेधाज्ञा है जो भविष्य में ऐसे मामलों में एक नजीर पेश करेगी।

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