रांची , अगस्त 20 -- झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी समेत प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में सुधार की मांग को लेकर हजारीबाग लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी एवं आजसू पार्टी के महासचिव संजय मेहता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विस्तृत मांग पत्र सौंपा है।
उन्होंने राज्य में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, छात्रवृत्ति वितरण और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए 'झारखंड शिक्षा, परीक्षा, छात्रवृत्ति एवं पारदर्शी नियुक्ति (पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत सुधार) विधेयक, 2026' लागू करने की मांग की है। इसके साथ उन्होंने प्रस्तावित विधेयक का पूरा मसौदा भी मुख्यमंत्री को भेजा है।
श्री मेहता ने अपने पत्र में कहा है कि झारखंड गठन के करीब 25-26 वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी समेत राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन और नियुक्ति प्रक्रिया लगातार विवाद, अनियमितता, पेपर लीक, देरी और बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता से प्रभावित रही है। उन्होंने हाल के छात्र आंदोलन के बाद सरकार द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों का स्वागत किया, लेकिन कहा कि केवल आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का इस्तीफा या बदलाव समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी संस्था की विश्वसनीयता केवल व्यक्तियों की विश्वसनीयता पर निर्भर नहीं हो सकती।
श्री मेहता ने मुख्यमंत्री के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि एसओपी का पालन होता तो समस्या नहीं आती। उन्होंने तर्क दिया कि एसओपी बाध्यकारी कानून नहीं, बल्कि मार्गदर्शिका हो सकती है। ऐसे में जिम्मेदार पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कानून की जरूरत है।
श्री मेहता ने पत्र में झारखंड राज्य परीक्षा एजेंसी (जेएसटीए) के गठन का सुझाव दिया गया है। इसके तहत राज्य सरकार की अपनी स्वतंत्र परीक्षा एजेंसी बनाने की मांग की गई है, जिसका नेतृत्व अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी के हाथों में हो। यह एजेंसी राज्य स्तरीय प्रतियोगी एवं नियुक्ति परीक्षाओं के आयोजन, प्रश्नपत्र प्रबंधन, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, डिजिटल एवं साइबर सुरक्षा तथा डेटा विश्लेषण की जिम्मेदारी संभालेगी। वहीं, आयोगों को उनकी संवैधानिक भूमिका यानी चयन सूची की अनुशंसा तक सीमित रखने का प्रस्ताव है।
पत्र में सीआईडी के तहत विशेष परीक्षा अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ गठित करने का सुझाव दिया है। पेपर लीक, संगठित नकल, डमी अभ्यर्थी, साइबर हैकिंग, परीक्षा माफिया और परिणाम में हेराफेरी जैसे मामलों के लिए विशेष अदालत और विशेष लोक अभियोजक की व्यवस्था करने की बात कही गई है। ऐसे मामलों का निपटारा अधिकतम 3 से 6 महीने में करने तथा दोषियों की संपत्ति कुर्क या जब्त करने का प्रावधान रखने का सुझाव दिया गया है।
श्री मेहता ने प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक अगले वर्ष का परीक्षा कैलेंडर जारी करना अनिवार्य करने का सुझाव दिया है। विज्ञापन जारी होने से नियुक्ति तक की प्रक्रिया सामान्यतः 12 महीने में पूरी करने का लक्ष्य रखने की बात कही गई है। परीक्षा के विभिन्न चरणों के लिए भी समय-सीमा तय करने और अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्रवाई का प्रावधान सुझाया गया है।
श्री मेहता ने पत्र में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, क्यूआर कोड, जियो-फेंसिंग, कंप्यूटर आधारित परीक्षा, बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन, एआई निगरानी, लाइव मॉनिटरिंग और केंद्रीय नियंत्रण कक्ष जैसी व्यवस्थाएं लागू करने का सुझाव दिया गया है। प्रश्नपत्र निर्माण की जिम्मेदारी निजी बाहरी एजेंसियों को नहीं देने की बात भी कही गई है।
मसौदे के अनुसार परीक्षा के 72 घंटे के भीतर प्रारंभिक उत्तर कुंजी जारी करने, आपत्तियों के बाद अंतिम उत्तर कुंजी प्रकाशित करने तथा सभी अभ्यर्थियों के अंक, कटऑफ, श्रेणीवार कटऑफ और श्रेणीवार चयन सूची सार्वजनिक करने का प्रस्ताव है।
पत्र में विश्वविद्यालयों के लिए निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने, परीक्षा और परिणाम की समय-सीमा तय करने तथा डिग्री अधिकतम 180 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने की व्यवस्था का सुझाव दिया गया है। छात्रवृत्ति के लिए केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल को मजबूत करने और आवेदन के 30-45 दिनों के भीतर डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे विद्यार्थियों के खाते में भेजने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश, पूर्व यूपीएससी या राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, शिक्षा विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों वाली स्वतंत्र निरीक्षण समिति बनाने का सुझाव दिया गया है। आयोग के अधिकारियों के वार्षिक संपत्ति विवरण को सार्वजनिक करने, संवेदनशील पदों पर 2-3 वर्ष में स्थानांतरण, अभ्यर्थी सुविधा सेल, शिकायत निवारण पोर्टल तथा परीक्षा रद्द होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को मुआवजा और आयु सीमा में छूट जैसे प्रावधान भी मसौदे में शामिल हैं।
श्री मेहता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस प्रस्ताव पर विशेषज्ञों से विधिक राय लेकर इसे और व्यापक बनाया जाए तथा कैबिनेट में रखने के बाद विधानसभा में विधेयक के रूप में प्रस्तुत कर पारित कराया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा कानून झारखंड के युवाओं को सुरक्षित, पारदर्शी, समयबद्ध और विश्वसनीय परीक्षा एवं नियुक्ति व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित