यमुनानगर , सितंबर 03 -- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) के बीच देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन क्षमताओं के विकास को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये हैं।

सीआईएसएफ यूनिट यमुनानगर थर्मल पावर प्लांट के सहायक कमांडेंट विजय गुप्ता ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सीआईएसएफ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सीआईएसएफ की ओर से डीआईजी (प्रधानाचार्य) एमपीआरटीसी, बहरोड़ डॉ. सी.डी. नाइक और डीएफआई की ओर से अध्यक्ष स्मित शाह ने समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस दौरान सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन सहित वरिष्ठ अधिकारी और डीएफआई के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

सीआईएसएफ देशभर में 370 से अधिक महत्वपूर्ण इकाइयों, जिनमें हवाई अड्डे, परमाणु प्रतिष्ठान, अंतरिक्ष केंद्र और तेल रिफाइनरियां शामिल हैं, की सुरक्षा कर रहा है। ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और हवाई खतरों को देखते हुए सीआईएसएफ ड्रोन की पहचान, निगरानी और जवाबी कार्रवाई की क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है।

सहायक कमांडेंट ने बताया कि सीआईएसएफ के 3,000 से अधिक कर्मियों को ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि करीब 80 इकाइयां निगरानी, खतरा पहचान और प्रशिक्षण के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग कर रही हैं। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की समर्पित टीम भी गठित की गयी है।

समझौते के तहत एमपीआरटीसी, बहरोड़ को ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन सिस्टम के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि ड्रोन फेडरेशन भारतीय ड्रोन स्टार्टअप्स और तकनीकी कंपनियों के साथ मिलकर क्षमता निर्माण, अनुसंधान और परिचालन तैयारी को बढ़ावा देगा।

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