नयी दिल्ली , अप्रैल 19 -- भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने देश में उद्योगों के विकास को गति देने के लिए राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक बनाने का सुझाव दिया है।
परिसंघ की रविवार को जारी रिपोर्ट में कहा इस बात पर जोर दिया गया है कि निवेश को तेज करने, परियोजनाओं में लगने वाले समय को कम करने और देश को एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए औद्योगिक भूमि तक कुशल और पारदर्शी पहुंच अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सीआईआई का कहना है कि विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स के लिए औद्योगिक भूमि एक बुनियादी संसाधन है। विभिन्न राज्यों में वर्तमान व्यवस्था खंडित प्रक्रियाओं, जटिल विनियमों, अस्पष्ट भूमि शीर्षक, कब्ज़ा मिलने में देरी और आवंटित भूमि के कम उपयोग जैसी समस्याओं से ग्रस्त है। इनके कारण पूंजी लागत बढ़ती है, परियोजनाओं में देरी होती है, और विशेष रूप से छोटे तथा मझौले उद्योगों और बिल्कुल नयी परियोजनाओं के प्रति निवेशकों का विश्वास कमजोर होता है।
रिपोर्ट की एक प्रमुख सिफारिश एकीकृत और जीआईएस-सक्षम राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक की स्थापना है जिससे भूमि की उपलब्धता, जोनिंग स्थिति, उपयोगिताओं, पर्यावरणीय बाधाओं और स्वामित्व की स्पष्टता पर तत्काल जानकारी प्राप्त हो सके। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेश निर्णय तेज और बेहतर होंगे।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि मेक इन इंडिया राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स के तहत देश की विनिर्माण महत्वाकांक्षाएं तब तक पूरी नहीं हो सकतीं, जब तक औद्योगिक भूमि सहज, पारदर्शी और निवेश के लिए तैयार न हो।
रिपोर्ट में औद्योगिक भूमि के पूरे जीवनचक्र का विस्तृत विश्लेषण किया गया है, जिसमें भूमि की खोज और पहचान, आवेदन, आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन, स्वामित्व, भौतिक कब्जा, आवंटन के बाद उपयोग आदि शामिल हैं।
रिपोर्ट में औद्योगिक भूमि आवेदन के लिए पूर्णतः एकीकृत डिजिटल सिंगल-विंडो प्रणाली की भी वकालत की गई है।
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