बेंगलुरु , अगस्त 25 -- कर्नाटक में बेंगलुरु की एक अदालत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा पर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में दर्ज मानहानि प्रकरण के सिलसिले में कांग्रेस विधायक प्रदीप ईश्वर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है।
सूत्रों के अनुसार कार्यवाही के दौरान श्री ईश्वर और उनके वकील के न्यायालय के समक्ष उपस्थित न होने के बाद सांसदों और विधायकों के लिए बनी विशेष न्यायालय ने यह वारंट जारी किया।
यह मामला 11 जनवरी 2024 को चिकबल्लारपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान श्री ईश्वर द्वारा कथित तौर पर की गयी टिप्पणियों से संबंधित है। इसके बाद श्री सिम्हा ने न्यायालय का रुख करते हुए आरोप लगाया कि विधायक ने उनके खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि विधायक ने भाजपा और राम मंदिर से जुड़े राजनीतिक मुद्दों का भी जिक्र किया।
श्री सिम्हा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 का हवाला देते हुए 22 फरवरी 2024 को बेंगलुरु न्यायालय के समक्ष मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। न्यायालय ने शिकायत पर संज्ञान लिया और कार्यवाही शुरू की। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने श्री ईश्वर को पेश होने का निर्देश दिया था और समन जारी किया था। निर्धारित सुनवाई के दिन न तो विधायक और न ही उनके वकील न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए, जिसके कारण न्यायालय को गैर-जमानती वारंट जारी करना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक न्यायालय ने मामले को 7 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है।
श्री ईश्वर अगली सुनवाई से पहले न्यायालय के समक्ष पेश हो सकते हैं और वारंट को रद्द करने की मांग कर सकते हैं। पुलिस भी उन्हें हिरासत में लेकर न्यायालय के समक्ष पेश कर सकती है।
कानूनी सूत्रों ने कहा कि हालांकि यह मामला मानहानि का है और हत्या या दुष्कर्म जैसा गंभीर आपराधिक अपराध नहीं है, फिर भी उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से छूट मांगे जाने को छोड़कर न्यायालय के निर्देशों का पालन करना और कार्यवाही के दौरान उपस्थित होना अनिवार्य है।
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