भुवनेश्वर , जून 02 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में बाघिन जीनत के चार शावकों को जन्म दिये जाने का स्वागत किया। उन्होंने इसे राज्य की वन्यजीव संरक्षण यात्रा में बड़ी कामयाबी बताया।

'एक्स' पर खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा के प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों की रक्षा के प्रयासों में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

मुख्यमंत्री माझी ने बताया कि महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से लायी गयी बाघिन जीनत ने सिमलीपाल के अनुकूल आवास में चार शावकों को जन्म दिया है।

उन्होंने इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया, जो राज्य में बाघों की आबादी को मजबूत करेगी और साथ ही वैज्ञानिक संरक्षण व आवास प्रबंधन की पहलों की कामयाबी को भी प्रदर्शित करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शावकों का जन्म जैव विविधता संरक्षण के प्रति प्रशासन के दृष्टिकोण और वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित व टिकाऊ वातावरण बनाने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने उल्लेख किया कि वन विभाग ने जीनत और उसके शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय किये हैं और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि वन कर्मियों के समर्पित प्रयासों और प्रभावी संरक्षण नीतियों के कारण ओडिशा वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में उभरा है।

संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि सिमलीपाल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाये रखने और पूरे राज्य में वन्यजीव संरक्षण की पहलों को और मजबूत करने के प्रयास जारी रहेंगे।

बाघों की संख्या बढ़ाने और आनुवंशिक विविधीकरण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में तीन वर्षीय जीनत को नवंबर 2024 में महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से सिमलीपाल टाइगर रिजर्व लाया गया था।

इस स्थानांतरण का उद्देश्य सिमलीपाल के बाघों के जीन पूल को समृद्ध करना था, जो अपने दुर्लभ काले बाघों के लिए जाना जाता है और साथ ही अन्तःप्रजनन के जोखिम को कम करने में मदद करना था।

दिसंबर 2024 में जंगल में छोड़े जाने के तुरंत बाद जीनत रिजर्व से भटक गयी और उसने ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। उसकी इस आवाजाही ने लोगों का काफी ध्यान खींचा, क्योंकि तीनों राज्यों के वन अधिकारी लगभग एक महीने तक उसकी निगरानी कर रहे थे।

आखिरकार 29 दिसंबर 2024 को पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में बाघिन को ट्रैंक्विलाइज किया गया। कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में कुछ समय तक निगरानी में रखने के बाद उसे जनवरी 2025 की शुरुआत में सुरक्षित रूप से सिमलीपाल वापस लाया गया था।

एक बाड़े में कुछ समय बिताने के बाद, जीनत को रिजर्व के मुख्य क्षेत्र में छोड़ दिया गया। वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि उसने मई 2025 के मध्य में एक शक्तिशाली काले नर बाघ के साथ सफलतापूर्वक मेटिंग किया, जिससे इन चार शावकों के जन्म का रास्ता साफ हुआ।

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