सहारनपुर , अगस्त 07 -- उत्तर प्रदेश में सहारनपुर की एक अदालत ने सिपाही राहुल ढाका की हत्या के मामले में 13 साल बाद फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों मेहताब और सादर को दोषी करार दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) संजय कुमार ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ 75-75 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
अभियोजन के अनुसार पांच जून 2013 को सुबह करीब साढ़े नौ बजे मलिरा रोड की पुलिया के पास कुख्यात मुकिम काला गिरोह के सदस्यों के साथ पुलिस की मुठभेड़ के दौरान सीओ सदर उमेश कुमार यादव के गनर सिपाही राहुल ढाका की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
पुलिस ने वर्ष 2014 में मुकिम काला को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में चित्रकूट जेल में गैंगवार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसी गिरोह के एक अन्य सदस्य साबिर को शामली पुलिस ने वर्ष 2018 में मुठभेड़ में मार गिराया था। गिरोह के जीवित बचे सदस्यों मेहताब और सादर के खिलाफ मामले की सुनवाई चल रही थी। अदालत ने दोनों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। वर्तमान में दोनों राजस्थान की अलग-अलग जेलों में बंद हैं। मेहताब जयपुर सेंट्रल जेल, जबकि सादर अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में निरुद्ध है।
अदालत के फैसले पर राहुल ढाका की मां हरबीरी और भाई मनोज ढाका ने कहा कि यदि उनके बेटे और भाई के हत्यारों को फांसी की सजा सुनाई जाती तो उन्हें अधिक सुकून मिलता। हालांकि, उन्होंने अदालत के फैसले पर संतोष भी जताया।
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