बेंगलुरु , अगस्त 19 -- कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्वारमैया का मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की पहली बैठक में शामिल नहीं होना और हाल ही में हुए मंत्रिपरिषद विस्तार में जगह न मिलने से नाराज़ कई वरिष्ठ विधायकों का बैठक का बहिष्कार करना, सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर पनप रही नाराज़गी को उजागर करता है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने विधानसभा सत्र के दौरान बुधवार को यहां एक निजी होटल में आयोजित यह बैठक विपक्ष का मुकाबला करने के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाने के उद्देश्य से बुलायी थी।
लेकिन श्री सिद्वारमैया बेंगलुरु में मौजूद होने के बावजूद और कांग्रेस के कई वरिष्ठ विधायकों का बैठक में शामिल न होने से इस बैठक को एक नया राजनीतिक आयाम मिला। इससे हाल ही में हुए नेतृत्व परिवर्तन और मंत्रिमंडल फेरबदल के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलों को और बल मिला है।
बैठक से दूर रहने वालों में एच.सी. महादेवप्पा, शिवानंद पाटिल, एम. कृष्णप्पा, प्रियाकृष्ण, एम.सी. सुधाकर, एस.एन. नारायणस्वामी और कोथनूर मंजूनाथ शामिल थे। बताया जाता है कि ये सभी विस्तारित मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से निराश थे।
यह घटनाक्रम तब हुआ जब श्री शिवकुमार एकता का संदेश देने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने विधायकों से कहा कि कांग्रेस को एकजुट रहना चाहिए और विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा और जनता दल (एस) का मिलकर मुकाबला करना चाहिए।
रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने मंत्री पद के दावेदारों की निराशा को स्वीकार किया और कहा कि कई वरिष्ठ नेताओं के कैबिनेट में शामिल होने के योग्य होने के बावजूद सभी को जगह देना संभव नहीं था।
श्री शिवकुमार ने विधायकों से सहयोग मांगते हुए कहा, "मैं भी उस दर्द को महसूस करता हूं।" उन्होंने विधायकों को निर्देश दिया कि वे सदन में अपनी उपस्थिति बनाए रखें, सरकार का बचाव करें और विपक्ष के हमलों का जवाब देते समय मंत्रियों का साथ दें। उन्होंने उनसे भाजपा का मुकाबला करने और उनके द्वारा बताए गए घोटालों को उजागर करने के लिए भी कहा।
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