बेंगलुरु , जून 12 -- कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा अनुदान आवंटन में भेदभाव के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती मंज़ूरी की प्रक्रिया पूरी तरह से सरकारी नियमों के अनुसार और बिना किसी खास समुदाय को ध्यान में रखकर दी गई थी।
पिछड़ा वर्ग संगठनों को अनुदान देने की आलोचना के बीच श्री सिद्दारमैया ने स्पष्ट किया कि विभाग ने पूरे राज्य के लगभग 155 पिछड़ा वर्ग के संघों एवं संगठनों को फ़ायदा पहुंचाने वाले कम्युनिटी हॉल और छात्रावास निर्माण के लिए 71.85 करोड़ रुपये की परियोजना को शुरुआती मंज़ूरी प्रदान की।
उन्होंने बल देकर कहा कि मंज़ूर की गई सूची केवल शुरुआती थी न कि लाभार्थियों की अंतिम सूची थी।
इस आरोप का जवाब देते हुए कि कुरुबा समुदाय को अनुदान का बहुत ज़्यादा हिस्सा मिला है, श्री सिद्दारमैया ने कहा कि कुरुबा संगठनों की ओर से जमा की गई अर्जियों की संख्या दूसरे समुदायों की तुलना में बहुत ज़्यादा थी।
उन्होंने कहा, "विभाग को मिले आवेदनों की जांच के बाद अनुदान मंज़ूर किए गए। किसी भी समुदाय के साथ जान-बूझकर कोई भेदभाव नहीं किया गया।"उन्होंने आगे कहा कि कई अन्य पिछड़े समुदायों के संगठनों की ओर से जमा किए गए आवेदनों पर भी विचार किया जा रहा है और आने वाले दिनों में उन पर निर्णय लिया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, कुरुबा, मडीवाला, लिंगायत, वोक्कालिगा, बेस्टा, बलिजा, गोला, जेट्टी, कुंभारा, अरासु, हेलावा, सविता समाज, उप्पारा, गनिगा, कुरुहिना शेट्टी, हलाक्की और रेड्डी सहित अन्य समुदायों को लाभ पहुंचाने वाली परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक मंजूरी प्रदान की गई है।
श्री सिद्दारमैया ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश का मतलब अनुदान जारी करना नहीं है। अनुदान का फ़ायदा प्राप्त करने वाले संगठनों को सबसे पहले ज़रूरी दस्तावेज़ जैसे स्थानीय निकायों से बिल्डिंग लाइसेंस, तीन साल की ऑडिट रिपोर्ट और दूसरे रिकॉर्ड संबंधित ज़िला प्रशासन के माध्यम से पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में जमा करने होंगे।
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की प्रगति और सरकार द्वारा समय-समय पर की जाने वाली समीक्षाओं के आधार पर अनुदान तीन चरणों में जारी की जाएगी।
आवंटन फ़ॉर्मूला के बारे में बताते हुए श्री सिद्दारमैया ने कहा कि मौजूदा सरकारी गाइडलाइंस के मुताबिक, अनुदान का 70 प्रतिशत हिस्सा कैटेगरी एक और कैटेगरी 2ए में आने वाले समुदायों के लिए निर्धारित किया गया है जबकि बाकी 30 प्रतिशत हिस्सा कैटेगरी 3ए और 3बी में आने वाले समुदायों के लिए सुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि कुछ समुदायों को ज़्यादा आवंटन मुख्य रूप से इसलिए मिला क्योंकि कैटेगरी एक और 2ए में ज़्यादा पात्र समूह शामिल हैं और उन्होंने बड़ी संख्या में आवेदन भी किया था।
श्री सिद्दारमैया का यह स्पष्टीकरण कल्याणकारी अनुदानों के वितरण को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया है, जिसमें विपक्षी दलों और समुदाय के कुछ नेताओं ने लाभार्थियों के चयन में पक्षपात का आरोप लगाया है।
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