बेंगलुरु , मई 27 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के इस्तीफे को लेकर चल रही उठापटक बुधवार को भी जारी रही। कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस बारे में तत्काल किसी फैसले से इन्कार किया तो वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता आर वी देशपांडे ने दावा किया कि मुख्यमंत्री गुरुवार को इस्तीफा दे सकते हैं।

श्री सुरजेवाला ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस विधायक दल की कोई बैठक नहीं बुलाई गई है और पार्टी आलाकमान ने नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर कोई फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा, " जैसे-जैसे चीजें आगे बढ़ेंगी, हम आपको सूचित करेंगे।" उनकी यह टिप्पणी श्री सिद्दारमैया के राजनीतिक भविष्य को जारी अटकलों के बीच आयी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता, मंत्री और विधायक दिनभर मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास कावेरी में जमा होते रहे, क्योंकि ऐसी खबरें थीं कि वह गुरुवार को ही पद छोड़ सकते हैं।

अटकलों को विराम देने का प्रयास करते हुए श्री सुरजेवाला ने मीडिया से कर्नाटक के नेतृत्व के सवाल पर समय से पहले निष्कर्ष नहीं निकालने का आग्रह करते हुए कहा कि वह यह नहीं बता सकते कि एक महीने, 20 दिन, कल, छह महीने या एक वर्ष के बाद क्या होगा। जो भी बात कही जा रही है वह केवल एक अनुमान है।

श्री सुरजेवाला ने श्री सिद्दारमैया और श्री शिवकुमार दोनों का पुरजोर समर्थन किया और कांग्रेस के लिए दोनों को अहम बताया। श्री सिद्दारमैया को एकबेहद वरिष्ठ और सम्मानित नेता बताते हुए उन्होंने विपक्ष के नेता और दो बार के मुख्यमंत्री के रूप में पार्टी में उनके महती योगदान की सराहना की। उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए कर्नाटक में पार्टी के ढांचे को मजबूत करने में श्री शिवकुमार की संगठनात्मक शक्ति और भूमिका की भी तारीफ की।

श्री सुरजेवाला ने कहा, " आने वाले दिनों में पार्टी जो भी फैसले लेगी, मैं आपको सूचित करूंगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी कोई भी फैसला केवल कर्नाटक के हित में लेंगे, न कि व्यक्तियों के पक्ष में। "आधिकारिक इनकार के बावजूद, बेंगलुरु में राजनीतिक माहौल तब और गरमा गया जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता आर वी देशपांडे ने दावा किया कि सिद्दारमैया पहले ही इस्तीफा देने का मन बना चुके हैं। श्री देशपांडे ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया है। वह कल इस्तीफा दे सकते हैं। श्री देशपांडे ने कहा कि कई विधायकों ने सिद्दारमैया से मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि वह अपना वचन दे चुके हैं।

इन विरोधाभासी घटनाक्रमों के कारण श्री सिद्दारमैया के आवास पर राजनीतिक विचार-विमर्श का दौर शुरू हो गया। इस अनिश्चितता के बीच कई मंत्रियों और विधायकों ने उनसे मुलाकात की। इनमें मंत्री सर्वश्री एचके पाटिल, एचसी महादेवप्पा, जमीर अहमद खान, ईश्वर खंड्रे और संतोष लाड शामिल थे और कुछ विधायक भी मौजूद थे। जनता दल सेक्युलर के नेता जीटी देवेगौड़ा ने भी श्री सिद्दारमैया से मुलाकात की। बैठक के बाद एच के पाटिल ने कहा कि कई नेताओं ने श्री सिद्दारमैया के पद छोड़ने की खबरों पर चिंता व्यक्त की है, लेकिन मुख्यमंत्री पूरी तरह से शांत रहे।

इसके विपरीत, कर्नाटक के उद्योग मंत्री एम बी पाटिल ने इस्तीफे की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया और दावा किया कि सिद्दारमैया के पद छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

एक तीसरे घटनाक्रम में इस बीच कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर के आवास पर एक विशेष पूजा आयोजित की गयी। इसने भी राजनीतिक मामलों के जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा। श्री परमेश्वर ने कहा कि वह दिल्ली में श्री सिद्दारमैया और कांग्रेस आलाकमान के बीच हुई चर्चाओं से अनभिज्ञ हैं और उन्हें नहीं पता कि क्या फैसला लिया गया है।

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