फरीदकोट/ अमृतसर , जुलाई 31 -- श्री अकाल तख्त साहिब से शुरू हुए मीरी-पीरी खालसामार्च के आठवें दिन शुक्रवार को जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब के सिख विधायकों से अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के फैसलों को लागू कराने में भूमिका निभाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सिख के लिए सबसे पहले गुरु ग्रंथ साहिब और गुरु पंथ सर्वोपरि हैं तथा धर्म में किसी भी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

फरीदकोट स्थित गुरुद्वारा खालसा दीवान से मार्च के अगले चरण के लिए रवाना होने से पहले आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि सरकार यह प्रचार कर रही है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी संबंधी प्रस्तावित कानून पर श्री अकाल तख्त साहिब की सभी आपत्तियां मान ली गयी हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सिख पंथ को बेअदबी करने वालों के लिए कठोर से कठोर सजा देने वाले कानून पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप, सेवा, मर्यादा और संरक्षण से जुड़े मामलों में सरकार या किसी सरकारी अधिकारी का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी सरकारी अधिकारी द्वारा सिखों के घरों में जाकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की जांच करना धार्मिक स्वतंत्रता और गुरु-सिख संबंधों में सीधा हस्तक्षेप होगा। उन्होंने सरकार से उन प्रावधानों को हटाने की मांग दोहराई, जिन पर सिख संगत ने आपत्ति जतायी है।

इस अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख पंथ की सर्वोच्च संस्था है और उसके निर्देशों की अनदेखी सिख समुदाय कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले आवश्यक संशोधन करने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में केवल स्पष्टीकरण पत्र भेजकर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया।

श्री धामी ने कहा कि मीरी-पीरी खालसा मार्च का उद्देश्य किसी से टकराव नहीं, बल्कि गुरु साहिब के सिद्धांतों, श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और सिख अधिकारों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने संगत से गुरु की मर्यादा, सत्य, न्याय और भाईचारे के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया।

आठवें दिन खालसा मार्च गुरुद्वारा खालसा दीवान, फरीदकोट से रवाना होकर गुरुद्वारा गंगसर साहिब, जैतो के लिए प्रस्थान किया। मार्ग में पुलिस लाइन, गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी साहिब, संधवां, कोटकपूरा, बहिबल कलां, बरगाड़ी, बाजाखाना सहित विभिन्न स्थानों पर संगतों ने मार्च का गर्मजोशी से स्वागत किया। मार्च के साथ गुरु साहिबानों और शहीद सिंहों के शस्त्रों से सुसज्जित विशेष बस तथा शहीदों के चित्र आकर्षण का केंद्र रहे। बड़ी संख्या में युवाओं ने श्री अकाल तख्त साहिब के समर्थन में तख्तियां लहराते हुए अपनी श्रद्धा और समर्थन व्यक्त किया।

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