गंगटोक , मई 02 -- उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को सिक्किम को देश की पहली कागजरहित न्यायपालिका के रूप में मान्यता दी।

मुख्य न्यायाधीश ने 'प्रौद्योगिकी और न्यायिक शिक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन' के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सिक्किम को ऐसी परिवर्तनकारी पहल के लिए एक आदर्श स्थान बताया। उन्होंने विचारों के महान ऊंचाइयों तक पहुंचने की बात कही और सिक्किम के शांत वातावरण को चिंतन, परंपरा और प्रगति का एक आदर्श मेल बताया।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कठिन और दुर्गम इलाकों में न्याय तक पहुंचने की चुनौतियों पर बात करते हुए दूरदराज के क्षेत्रों में अदालतों तक पहुंचने को ऐतिहासिक रूप से धीरज की परीक्षा बताया। उन्होंंने कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचा और तेजी से हो रहा तकनीकी विकास अब पहुंच को फिर से परिभाषित कर रहे हैं, जिसमें डिजिटल नेटवर्क नए रास्ते बना रहे हैं और नागरिकों को सीधे न्यायिक मंचों से जोड़ रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायपालिका का दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करना है कि न्याय के लिए अब कठिन शारीरिक यात्रा की आवश्यकता न हो। उन्होंने कहा, "याचिकाएं आगे बढ़नी चाहिए, लोग नहीं।" उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि डिजिटल सुधार अब केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि कानून के शासन को बनाए रखने के लिए एक व्यावहारिक आवश्यकता है।

मुख्य न्यायाधीश ने इस विकास को व्यापक राष्ट्रीय ढांचे के भीतर रखते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी-संचालित सुधार इलाके, दूरी और वित्तीय बाधाओं से उत्पन्न होने वाली भौगोलिक रुकावटों को खत्म कर रहे हैं। ये पहल सभी क्षेत्रों में-उत्तरी सिक्किम से लेकर पश्चिमी घाट और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तक न्याय तक समान पहुंच को सक्षम बना रही हैं।

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