नयी दिल्ली , मई 20 -- पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) के मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया ने देश में कीवी के प्रमुख उत्पादक राज्य अरुणाचल प्रदेश में इसकी खेती और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को एक महत्वाकांक्षी मिशन शुरू किया जिस पर निजी और सरकारी क्षेत्र की ओर से कुल 170 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य है।
श्री सिंधिया ने "अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की विशेषता" नामक मिशन का यहां शुभारंभ करते हुए कहा कि इस मिशन का लक्ष्य राज्य में कीवी की खेती में नवाचार, प्रजाति में सुधार, फल की बर्बादी को रोकने के लिए फल तोड़ने के बाद उसके प्रबंधन, कोल्ड चेन , प्रसंस्करण और निर्यात- समग्र मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा, "यह केवल संपूर्ण सरकार, केंद्र और राज्य के विभिन्न विभागों की ही पहल नहीं बल्कि संपूर्ण देश की पहल है इसमें किसान, किसान उत्पादक संगठन, भारतीय कृषि अनुसंधान संगठन और एपीडा जैसी एजेंसियों, उद्यान विभाग, राज्य सरकार की एजेंसियां और निजी क्षेत्र की कंपनियां सभी शामिला होंगे।" इस मिशन के लिए 35 करोड़ रुपये का योगदान डोनर मंत्रालय की ओर से किया जाएगा।
डोनर मंत्री ने कहा, " प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' और 'लोकल टू ग्लोबल' का विज़न और विचारधारा ही इस मिशन के पीछे की मुख्य प्रेरणा शक्ति है। सिक्किम सहित पूर्वोत्तर की अष्ट लक्ष्मी कहे जाने वाले आठों राज्यों की अलग अलग विशेषताएं हैं । उनके एक एक विशिष्ठ उत्पादों की पहचान कर उनकी पहचान विश्व बाजार में स्थापित करने पर मिशन मोड में काम किया जा रहा है।"अरुणाचल कीवी मिशन के शुभारंभ कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि के साथ-साथ प्रदेश के कई जिलों के कीवी उत्पादक किसान वीडियो कांफ्रेंसिंग के साथ जुड़े थे।
श्री सिंधिया ने कहा, "अरुणाचल प्रदेश में कीवी उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। प्रति वर्ष 7,000 टन की उत्पादन क्षमता के साथ, यह राज्य देश की कुल उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत रखता है। यहां की कीवी मिठास और गुणवत्ता में दुनिया में सबसे अच्छी कीवी है पर अवसंरचना सुविधाओं की कमी के कारण किसानों और कारोबारियों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रसंस्करण और भंडारण सुविधाओं के अभाव में 20-40 प्रतिशत उपज नष्ट हो जाती है।"उन्होंने कहा कि यह मिशन अरुणाचल में कीवी की क्यारियों के पुनरोद्धार, नयी प्रजातियों के समावेश और वहां कुछ अन्य जिलों में कीवी की खेती के विस्तार, प्रशिक्षण, उत्पाद की ग्रेडिंग, भंडारण एवं कोल्ड चेन सुविधा के विस्तार, फल के स्वजीवन की अवधि 7-10 दिन से बढ़ा कर 30-45 दिन करने की व्यवस्था, फसल की ब्रैंडिंग और निर्यात प्रोत्साहन के लिए है। समयबद्ध तरीके से लागू किये जाने वाले इस मिशन के तहत 2028 तक सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अरुणाचल की कीवी की मजबूत पहचान बनायी जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 तक राज्य में कीवी की खेती में हेवर्ड किस्म की कीवी की खेती को 25 प्रतिशत तक करने की योजना है। इस प्रजाति की मांग अच्छी है और कमाई भी अच्छी होती है।
उन्होंने कहा कि यह मिशन आठ से 10 हजार किसान परिवारों की जिंदगी को प्रभावित करेगा। मंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों को प्रति किलो 20-40 रुपये की आमदनी होती है। प्रासेंसिंग और बाजार विस्तार से प्रति किलो 90-150 रुपये किलो का भाव मिल सकता है। इसे फ्रोजेन दशा में निर्यात करने पर 15-45 डॉलर प्रति किलो की आमदनी हो सकती है।
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