श्रीनगर , अगस्त 20 -- लद्दाख में जल और कृषि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रोजाना करीब नौ करोड़ लीटर ग्लेशियर का पानी सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, पहले यह पानी बिना उपयोग के सिंधु नदी में चला जाता था, लेकिन अब इसे मोड़कर 1,000 एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई की जाएगी।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की पहल पर लेह के पास स्टोक गांव नाला से ग्लेशियर का पानी आईगू-पेह सिंचाई नहर में पहुंचाया जा रहा है। इस परियोजना से करीब 12 गांवों को लाभ मिलने और लंबे समय से पानी की कमी के कारण बंजर पड़ी कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, इस पहल में किसी बड़े निर्माण या पूंजीगत व्यय के बजाय साधारण अर्थवर्क के जरिए ग्लेशियर से आने वाले पानी का मार्ग बदलकर उसका उपयोग किया जा रहा है। इसे लद्दाख को हरित, जल-सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लद्दाख में ग्लेशियर और बर्फ पिघलने से पर्याप्त जल उपलब्ध होने के बावजूद कृषि भूमि के बड़े हिस्से को लंबे समय से सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ता रहा है। उपराज्यपाल ने विभिन्न गांवों के दौरों के दौरान ऐसे स्थानों की पहचान करने की पहल की, जहां बड़ी मात्रा में ग्लेशियर का पानी बिना उपयोग के सिंधु नदी में चला जाता है।
इसी क्रम में स्टोक गांव नाला की पहचान की गई। यह नाला लेह के पास स्टोक कांगड़ी ग्लेशियर से निकलता है। उपराज्यपाल के निर्देश पर सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने 14 अगस्त को जेसीबी की मदद से दो स्थानों पर नाले की मुख्य जलधारा से अतिरिक्त पानी को आईगू-पेह नहर की ओर मोड़ने के लिए रास्ता बनाया।
अधिकारियों के अनुसार, स्टोक नाले से नीचे की ओर बहकर सिंधु नदी में जाने वाले पानी का प्रवाह करीब 36.60 क्यूसेक था। एक क्यूसेक करीब 28.32 लीटर प्रति सेकंड के बराबर होता है, यानी 24 घंटे में करीब नौ करोड़ लीटर पानी।
इसमें से 26 क्यूसेक पानी को दो मार्गों से आईगू-पेह नहर में पहुंचाया जा रहा है। इसमें 19 क्यूसेक पानी आईगू गांव की ओर और सात क्यूसेक पेह गांव की ओर मोड़ा गया है। शेष करीब 10 क्यूसेक पानी के उपयोग की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
43 किलोमीटर लंबी आईगू-पेह नहर का निर्माण 1979 में शुरू हुआ था और 2005 में पूरा हुआ। नहर के करीब 200 मीटर हिस्से को भूमिगत बनाया गया था, ताकि स्टोक नाले का पानी उसके ऊपर से गुजर सके और नहर का प्रवाह प्रभावित न हो। अधिकारियों के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि नहर की योजना बनाए जाने के समय भी इस क्षेत्र में पर्याप्त जल उपलब्ध था।
इस जल स्रोत का सिंचाई के लिए पर्याप्त उपयोग नहीं हो सका। पानी की कमी के कारण आईगू-पेह नहर में हर वर्ष समस्या बनी रही और बाद में इसका इस्तेमाल लगभग बंद हो गया।
प्रशासन के अनुसार, स्टोक नाले से रोजाना करीब नौ करोड़ लीटर पानी मोड़े जाने से आईगू-पेह नहर में पानी का प्रवाह मौजूदा करीब 50 क्यूसेक से बढ़कर लगभग 80 क्यूसेक हो जाएगा। पहले सीमित पानी के कारण नहर से जुड़े गांवों में पानी का वितरण रोस्टर के आधार पर किया जाता था। अब सभी 12 गांवों को प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराने की योजना है।
अधिकारियों का कहना है कि इससे हजारों एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी, फसल उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
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