भोपाल , मार्च 02 -- मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आज बड़वानी में हुई कृषि कैबिनेट को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस कैबिनेट में केवल कोरी घोषणाएं की गईं और ये मात्र मंत्रियों के पर्यटन का जरिया बन गई।

श्री सिंघार के कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा कि दो दशक से सत्ता में काबिज़ भाजपा सरकार ने 'कृषक कल्याण वर्ष 2026' के अंतर्गत भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पहली "कृषि कैबिनेट" की बैठक आयोजित की। दावा किया गया था कि इससे किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाएँ लाई जाएँगी, ताकि आय दोगुनी हो सके। लेकिन बड़वानी और निमाड़ क्षेत्र के किसानों को आखिर क्या मिला, कोरी घोषणाएं और मंत्रियों को पर्यटन।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने का फैसला लिया गया है, जबकि निमाड़ के किसान मुख्य रूप से कपास और मकई उगाते हैं। बड़वानी जिले की मुख्य फसलें कपास (कॉटन), सोयाबीन, मक्का व फलों में केला और पपीता हैं। यदि इनसे जुड़े उद्योग लगाए जाते, तो आदिवासी किसानों को वास्तविक लाभ मिलता।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2025 खरीफ सीजन में जिले के 30,324 किसानों ने नामांकन किया और प्रीमियम के रूप में कंपनियों को लगभग 52 करोड़ रुपये मिले। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से केवल 22 किसानों को कुल 2 लाख रुपए का क्लेम देकर मामला खत्म कर दिया गया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित