अमृतसर , सितंबर 12 -- पंजाब में अमृतसर के सारागढ़ी युद्ध की वर्षगांठ के अवसर पर शनिवार को यहां स्थित गुरुद्वारा सारागढ़ी साहिब में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद गुरमत समागम आयोजित किया गया।

इस दौरान सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के हजूरी रागी भाई नरेन्द्र सिंह के जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया, जबकि हरिमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी गुरमिंदर सिंह ने कथा-विचारों के माध्यम से संगत को संबोधित किया।

उन्होंने सारागढ़ी युद्ध का इतिहास साझा करते हुए कहा कि सिख सैनिकों ने अदम्य साहस के साथ लड़ते हुए शहादत प्राप्त की। उन्होंने कहा कि इन बहादुर सिख सैनिकों का अद्वितीय बलिदान आज भी दुनियाभर में याद किया जाता है। इस अवसर पर सारागढ़ी युद्ध के शहीदों के परिवारों के सदस्यों को सिरोपे देकर सम्मानित किया गया।

एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी सारागढ़ी युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सारागढ़ी का युद्ध सिख सैनिकों की वीरता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में 21 सिख सैनिकों ने करीब 10 हजार सैनिकों की सेना का मुकाबला किया था।

एडवोकेट धामी ने कहा कि सारागढ़ी के शहीद सिख सैनिक समर्पण और दृढ़ता की मिसाल थे। उनकी वीरता के कारण आज भी दुनियाभर में इन सूरमाओं की गाथा का उल्लेख होता है। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय को इन सैनिकों की बहादुरी पर हमेशा गर्व रहेगा।

इस अवसर पर एसजीपीसी के अतिरिक्त प्रबंधक बिक्रमजीत सिंह झंगी तथा शहीद परिवारों की ओर से मनजीत सिंह, रणजीत सिंह, सरबजोत सिंह और बीबी राजविंदर कौर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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