रायपुर , मार्च 21 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों से किए गए हर वादे को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक तथा तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए जनभागीदारी आवश्यक है तथा हर व्यक्ति को पौधारोपण के इस अभियान से जुड़ना चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से धान की खरीदी 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपये में कर रही है और अंतर की राशि का भुगतान भी एकमुश्त किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिले, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। किसानों से संवाद के दौरान उन्होंने धान खरीदी की अंतर राशि के भुगतान और विभिन्न योजनाओं के लाभ के बारे में भी जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन चुका है, लेकिन तिलहन उत्पादन में अभी भी कमी बनी हुई है। वर्तमान में देश अपनी आवश्यकता का लगभग 57 प्रतिशत ही तिलहन उत्पादन कर पा रहा है, जबकि शेष 43 प्रतिशत की पूर्ति आयात से करनी पड़ती है। इस स्थिति को बदलने के लिए तिलहन विकास से जुड़ी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने किसानों से वैज्ञानिकों के सुझावों को अपनाने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से तिलहन उत्पादन बढ़ाने की अपील की। उन्होंने जानकारी दी कि कृषक उन्नति योजना की तर्ज पर तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है।
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है और इसके लिए दलहन तथा तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाना जरूरी है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने तिलहन विकास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को विश्वविद्यालय के माध्यम से उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में संचालित 28 कृषि महाविद्यालयों, 27 कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से हर वर्ष लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
कार्यक्रम में लक्ष्मी राजवाड़े, चिंतामणि महाराज, प्रबोध मिंज, रामकुमार टोप्पो, विश्व विजय सिंह तोमर, मंजूषा भगत, राम किशुन सिंह, हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा, संभाग आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित