नयी दिल्ली , अप्रैल 07 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर राज्य में नक्सलवाद के अंत के बाद आई शांति के लिए उनका आभार जताया तथा बस्तर के समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी खाका प्रस्तुत किया।
इसके साथ ही श्री साय ने श्री मोदी को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण दिया, जहां उनकी मौजूदगी में कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है। उन्होंने प्रधानमंत्री से रेल तथा सिंचाई परियोजनाओं के भूमिपूजन के लिए समय देने का आग्रह किया।
उन्होंने मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री को बताया कि अब बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद राज्य सरकार का ध्यान तेजी से विकास, रोजगार सृजन और जनजीवन को सशक्त बनाने पर है। इसके तहत बस्तर रोडमैप 2.0 में कृषि और कृषि-वानिकी क्षेत्र, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार की 'नियद नेल्ला नार' योजना की सफलता पर ने प्रसन्नता जताई और कहा कि इससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है।
सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मुलाकात के दौरान श्री मोदी को बस्तर में अब तक किए गए विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार संतृप्ति करने, सम्पर्क करने, सुगम बनाने, सशक्त बनाने और संलग्न करने की रणनीति पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत किए गए कार्यों का राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) द्वारा तीसरे पक्ष से मूल्यांकन कराया गया है। सर्वे के अनुसार 93 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक स्कूल उपलब्ध हैं, जहाँ 97 प्रतिशत बच्चों को मध्याह्न भोजन, गणवेश तथा पुस्तकें मिल रही हैं। वहीं, 97 प्रतिशत गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जबकि अधिकांश गांव आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जुड़े हैं और 89 प्रतिशत ग्रामीणों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। मार्च 2026 तक राशन कार्ड तथा आधार कार्ड का संतृप्तिकरण 95 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।
श्री साय ने श्री मोदी को बताया कि बस्तर रोडमैप 2.0 के तहत 'नियद नेल्ला नार योजना' का विस्तार करते हुए अब इसमें 10 जिलों को शामिल किया जा रहा है, जिनमें बस्तर संभाग के सात जिलों के साथ गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई भी शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना प्रारंभ की गई है, जो वर्तमान में बस्तर के 38 मार्गों पर संचालित है। साथ ही बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे खेलों के आयोजनों से क्षेत्र में आत्मगौरव और नयी ऊर्जा का संचार हुआ है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि नक्सल-मुक्त पंचायतों में एल्वद योजना के तहत एक करोड़ रुपये तक के विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। वहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने श्री मोदी को बताया कि दंतेवाड़ा शैक्षणिक शहर की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में भी शैक्षणिक शहर बनाई जा रही है। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रारंभ हो चुका है तथा दूरस्थ क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र भी अब सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं। दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि इंद्रावती नदी पर मटनार और देउरगांव बैराज सहित 2000 करोड़ रुपये से अधिक की सिंचाई परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिससे कृषि और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
श्री साय ने श्री मोदी को बताया कि बस्तर के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है, जिसे अगले तीन वर्षों में बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रति माह तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आत्मनिर्भर आजीविका क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और हितग्राहियों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), सहकारी समितियों, एफपीओ एवं वनधन केंद्रों से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने बताया कि 'बस्तर मुन्ने' नामक संतृप्तता शिविर कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर लगाकर लोगों को योजनाओं का लाभ और समस्याओं का त्वरित समाधान उपलब्ध कराया जाएगा।
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