विशाखापत्तनम , फरवरी 18 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नौसेना के अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा को समुद्री परंपराओं के प्रति देशों के बीच एकता, विश्वास और सम्मान का प्रतीक बताते हुए कहा है कि यह वैश्विक समुदाय के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि सामूहिक नौसैनिक शक्ति की प्रतिबद्धता और संकल्प सभी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। श्रीमती मुर्मु ने बुधवार को यहां अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा के बाद कहा कि भारत का मानना है कि सुदृढ़ समुद्री व्यवस्था के लिए समान विचारधारा वाले साझेदारों के बीच सामूहिक जिम्मेदारी और सहयोग पर आधारित कार्रवाई की भावना जरूरी है। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में 70 से अधिक देशों की नौसेनाएं भाग ले रही हैं।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा को समुद्री परंपराओं के प्रति देशों के बीच एकता, विश्वास और सम्मान का प्रतीक बताते हुए कहा कि वैश्विक सुरक्षा विकास , स्थिरता और सतत साझेदारी के माध्यम से ही संभव है।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों के ध्वजों वाले जहाज और अलग-अलग देशों के नाविक साथ मिलकर एकजुटता की भावना प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह भावना इस वर्ष की विषय वस्तु "सागरों के माध्यम से एकता " में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। यह वैश्विक समुदाय के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि सामूहिक नौसैनिक शक्ति की प्रतिबद्धता और संकल्प सभी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
श्रीमती मुुर्मु ने कहा कि समुद्री क्षेत्र सहित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'वसुधैव कुटुंबकम्' अर्थात 'विश्व एक परिवार है' की भावना से प्रेरित है। यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि वैश्विक सुरक्षा, विकास, स्थिरता और सततता साझेदारी के माध्यम से ही संभव है। यही साझेदारी की भावना एक स्थायी वैश्विक व्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि भारत मानता है कि सुदृढ़ समुद्री व्यवस्था समान विचारधारा वाले साझेदारों के बीच सामूहिक जिम्मेदारी और सहयोगात्मक कार्यवाही पर आधारित होनी चाहिए। यह कार्यक्रम भारत की 'महासागर' पहल (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति) के उद्देश्य को मजबूत बनाता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय नौसेना भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और व्यापक समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सतर्क है। क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना की इकाइयां समुद्र में उत्पन्न खतरों और चुनौतियों के विरुद्ध प्रतिरोध और रक्षा के विश्वसनीय साधन हैं। मानवीय संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के समय भारतीय नौसेना प्रायः 'प्रथम प्रतिक्रिया बल' के रूप में त्वरित, संवेदनशील और सक्षम सहायता प्रदान करती है। साथ ही, भारतीय नौसेना विश्व की अन्य नौसेनाओं के साथ सद्भाव, विश्वास और मित्रता को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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