भागलपुर , फरवरी 07 -- बिहार में भागलपुर ज़िले के बिहपुर प्रखंड के मिल्की गांव (भालपुर क्षेत्र) में अवस्थित हज़रत सैयदना दाता मंगन शाह की दरगाह सामाजिक समरसता और साझा सांस्कृतिक विरासत की मिसाल है।

यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।मंगन साह दरगाह पर विगत छह फरवरी की रात एक हिंदू कायस्थ परिवार के द्वारा चादरपोशी से शुरुआत हुई है जो 12 फरवरी 2026 तक चलेगा।

स्थानीय कमिटी ने बताया कि दाता के दरगाह पर न केवल भागलपुर जिला बल्कि नजदीकी जिले के साथ-साथ दूसरे प्रदेश के लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यह परंपरा लगभग 250 वर्षों से भी अधिक समय से चली आ रही है।प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला उर्स मेला हज़रत मंगन शाह की पुण्यतिथि के अवसर पर मनाया जाता है।यह आयोजन समय के साथ-साथ नवगछिया और आसपास के क्षेत्रों का एक प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है,जिसमें बिहार सहित पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक सम्मिलित होते हैं।

उर्स का मूल भाव आत्मा के परमात्मा से मिलन का प्रतीक है। श्रद्धालु दरगाह पर उपस्थित होकर दुआ, मन्नत एवं चादरपोशी के माध्यम से अपनी आस्था प्रकट करते हैं। मान्यता है कि यह स्थल श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। विभिन्न समुदायों के लोग यहां समान श्रद्धा के साथ उपस्थित होकर मानवता, सेवा और करुणा के सूफी संदेश को आत्मसात करते हैं।

उर्स मेला की एक विशिष्ट और उल्लेखनीय परंपरा यह है कि उर्स की पहली चादर चढ़ाने का कार्य बिहपुर के एक हिंदू कायस्थ परिवार द्वारा किया जाता है, जो लगभग दो शताब्दियों से अधिक समय से अनवरत रूप से निभाई जा रही है।

रंगरा क्षेत्र के रहने वाले राशिद आलम ने बताया कि यह परंपरा बिहार की गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण है, जहाँ विभिन्न धर्मों के अनुयायी आपसी सम्मान और विश्वास के साथ धार्मिकत आयोजनों में सहभागी बनते हैं। उर्स के दौरान हिंदू, मुस्लिम एवं अन्य समुदायों के लोग समान भाव से पूजा-अर्चना एवं प्रार्थना में सम्मिलित होते हैं, जो सामाजिक एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का सशक्त संदेश देता है।

उर्स मेला धार्मिक आयोजन के साथ-साथ एक लोक सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप भी ग्रहण करता है। मेला के दौरान स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान, खिलौनों एवं अन्य सामग्री की दुकानों से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलता है। यह आयोजन स्थानीय निवासियों के लिए आजीविका के अवसर भी सृजित करता है।

वर्तमान समय में, जहां सामाजिक विभाजन की चुनौतियाँ विद्यमान हैं, वहीं हज़रत मंगन शाह का उर्स मेला भाईचारे, सहिष्णुता और समावेशी विकास का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह आयोजन बिहार की साझा सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सामाजिक शांति एवं सौहार्द को भी मजबूती प्रदान करता है।

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