चेन्नई , अक्टूबर 29 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ सी विजय की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में 'सामाजिक न्याय आयोग' के गठन को मंजूरी दे दी गई।

इस फैसले से 18 जून को विधानसभा में राज्यपाल के पहले अभिभाषण में की गई घोषणा के अनुरूप पूरे राज्य में सामाजिक न्याय सर्वेक्षण कराने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बिजली, कानून एवं जेल मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने बताया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित होने वाले इस सामाजिक न्याय आयोग में वरिष्ठ नौकरशाह सदस्य के रूप में शामिल होंगे। आयोग का गठन केंद्र सरकार द्वारा अपनी जाति-आधारित जनगणना प्रक्रिया पूरी करने के बाद अगले वर्ष फरवरी-मार्च के आसपास किया जाएगा। यह आयोग सामाजिक न्याय सर्वेक्षण के संचालन की रूपरेखा और तौर-तरीकेतैयार करेगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली नयी तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) सरकार के गठन के बाद 17वीं विधानसभा के पहले सत्र के दौरान राज्यपाल आर. वी. अर्लेकर ने अपने प्रथागत अभिभाषण में केंद्र सरकार से जनसंख्या जनगणना के साथ जाति जनगणना कराने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि इस प्रक्रिया के बाद तमिलनाडु सरकार राज्य में सामाजिक न्याय सर्वेक्षण कराएगी।

राज्यपाल ने कहा था कि इस सरकार की मूल नीति है कि सच्चा सामाजिक न्याय तभी संभव है जब हर समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व मिले। इस नीति और वादे को पूरा करने के लिए राज्य सरकार केंद्र से तेजी से जाति गणना पूरी करने का आग्रह करेगी।

प्रस्तावित सर्वेक्षण को केंद्र द्वारा कराई जाने वाली जाति गणना से अलग बताते हुए मंत्री निर्मल कुमार ने कहा कि इसमें समुदायों का विस्तृत सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन शामिल होगा। इसके तहत पारिवारिक आय, व्यवसाय, भूमि का स्वामित्व, शैक्षणिक स्थिति, स्कूल और कॉलेज में नामांकन, पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच जैसे मानकों की जांच की जाएगी।

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