श्रीनगर , सितंबर 08 -- हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और कश्मीर के मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने मंगलवार को केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर में सामाजिक और राजनीतिक संगठनों पर कथित प्रतिबंध लगाने की नीति पर दोबारा विचार करने की अपील करते हुए कहा है कि इस तरह के कड़े प्रतिबंध स्थानीय नागरिकों और संगठनों के लिए उत्पीड़न और डराने-धमकाने का जरिया नहीं बनने चाहिए।

श्री मीरवाइज ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमन बहाली और स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि केंद्र सरकार जनभावनाओं और अपीलों को सुने तथा प्रतिबंधों की नीति पर फिर से विचार करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब ऐसे प्रतिबंधों को अदालतों में चुनौती दी जाती है, तो कानूनी प्रक्रिया को निष्पक्षता से चलने देना चाहिए और अधिकारियों को ऐसी किसी भी एकतरफा कार्रवाई से बचना चाहिए जो कानूनी उपायों को अर्थहीन बना दे। उन्होंने कुर्क की गई संपत्तियों और शैक्षणिक संस्थानों के संदर्भ में संयम बरतने तथा कानून एवं न्यायिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक जनसमर्थन वाली आवाजों को दरकिनार करके या उनकी जगह सुविधाजनक विकल्प खड़े करके कोई भी टिकाऊ राजनीतिक प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव रखने वाले समूहों को स्थान दिया जाना चाहिए और उनके साथ बातचीत से जुड़ा जाना चाहिए।

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