दरभंगा , अक्टूबर 31 -- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग में शनिवार को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। 'सरदार पटेल का दर्शन : सामाजिक एकता' विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने कहा कि सामाजिक एकता के बिना राष्ट्रीय एकता संभव नहीं है। राष्ट्रीय एकता केवल विचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका आधार समाज का आपसी जुड़ाव और सामंजस्य है।उन्होंने समाजशास्त्री मैकाइवर के कथन 'समाज सामाजिक संबंधों का जाल है' का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता तभी मजबूत हो सकती है, जब समाज के भीतर आपसी एकता और समन्वय हो। उन्होंने सामाजिक जुड़ाव की प्रक्रियाओं एसोसिएशन, एसिमिलेशन और इंटीग्रेशन की सैद्धांतिक व्याख्या करते हुए कहा कि सरदार पटेल ने देश को ऐसी आंतरिक मजबूती प्रदान की, जो राष्ट्रीय एकीकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी।

मुख्य अतिथि सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. ध्रुव कुमार ने सरदार पटेल की कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए डेविड मैक्लेलैंड की पुस्तक 'द अचीविंग सोसाइटी' तथा उनकी उपलब्धि अभिप्रेरणा संबंधी अवधारणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल एक महान सामाजिक मनोवैज्ञानिक थे। उन्होंने किसानों में अभूतपूर्व चेतना जगाई, अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवाओं की सुदृढ़ नींव रखी तथा सैकड़ों छोटी-बड़ी रियासतों का विलय कर अखंड भारत के निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि भारत को एक सूत्र में पिरोने में सरदार पटेल की भूमिका युगांतकारी रही है। उनके ऐतिहासिक योगदान के सम्मान में ही उनकी जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों को पाग एवं चादर भेंट कर सम्मानित करने के साथ हुआ। स्वागत भाषण में डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बरदोली सत्याग्रह का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां की महिलाओं ने ही वल्लभभाई पटेल को 'सरदार' की उपाधि दी थी। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के विचार दृढ़ थे, लेकिन उनका हृदय अत्यंत कोमल था।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. रघुवीर कुमार रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर उनका स्मरण किया। व्याख्यान में विभागीय शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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