नयी दिल्ली , अगस्त 14 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोग विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं जिससे यह विश्वास और मजबूत होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।
श्रीमती मुर्मु ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा कि भारत का संविधान देश के लोगों द्वारा निर्मित है और यह नागरिकों की भागीदारी पर आधारित है। लोकतंत्र की जननी भारतभूमि के निवासियों में जनभागीदारी की भावना हमेशा से रही है और देशवासी इसे नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अभियानों को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना भारतीय लोकतंत्र की प्रेरक उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठा और अवसर की समानता तथा व्यक्ति की गरिमा संविधान के प्रमुख आदर्श हैं। आज सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले नागरिक अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय और असाधारण योगदान दे रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि देश में प्रतिभा और अवसर के लिए व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के उत्तरदायित्वों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में जनता की आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें, जबकि कार्यपालिका का दायित्व जनहित और राष्ट्रहित से जुड़ी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना है।
उन्होंने न्याय-व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के दायित्व पर भी जोर देते हुए कहा कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए। प्रत्येक नागरिक, विशेषकर वंचित वर्गों के लोगों को समानता के आधार पर सम्मान के साथ और समय पर न्याय मिलना चाहिए।
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