दरभंगा, मई 13 -- बिहार में प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो.पुनीता झा ने बुधवार को कहा कि साक्षरता की शुरुआत उन कहानियों से होती है, जिन्हें हम दूसरों से सुनते हैं अथवा स्वयं अपने भीतर गढ़ते हैं।

स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग एवं डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'स्टोरी टेलिंग प्रतियोगिता' कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए अंग्रेजी विभागाध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीता झा ने कहा कि कहानी-कथन बच्चों एवं विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, अभिव्यक्ति क्षमता और संवेदनशीलता को विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।

प्रो. झा ने कहा कि छोटी-छोटी कहानियाँ जीवन के बड़े संदेश सरल एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत करती हैं। ये केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और नैतिक मूल्यों के संवर्धन का माध्यम भी हैं।

अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. आर्यिका पॉल ने कहा कि पुस्तकों के अस्तित्व में आने से पूर्व कहानी-कथन मुख्यतः मौखिक परंपरा का हिस्सा था। कथावाचक, कवि, पुरोहित एवं बुजुर्ग पीढ़ी-दर-पीढ़ी कहानियों को याद रखकर समाज तक पहुँचाते थे। मौखिक परंपरा ने संस्कृति, लोकज्ञान एवं सामाजिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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