नयी दिल्ली , जुलाई 10 -- भारत में साइबर धोखाधड़ी से कमाई गयी करीब 868 करोड़ रुपये की आय के धन शोधन के एक नेटवर्क की जांच में सफलता के लिए वित्तीय खुफिया यूनिट (एफआईयू) को एक प्रतिष्ठित अंतराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
इस मामले में धन शोधन के लिए अपराधियों के नेटवर्क ने 5000 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल किया था। अपराध का यह नेटवर्क कई देशों में फैला था और इसमें आभासी मुद्राओं का भी प्रयोग किया गया था। एफआईयू वित्त मंत्रालय की एजेंसी है। एफआईयू-इंडिया भारत सरकार की एक केंद्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की निगरानी करती है और मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवाद के वित्तपोषण जैसे आर्थिक अपराधों को रोकने का काम करती हैवित्त मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि एफआईयू (भारत) को बड़े स्तर के साइबर फ्राड की जांच में सफलता के लिए सर्वोत्तम एग्माँट केस अवार्ड (बेईसीए) 2026 के उप-विजेता का सम्मान मिला है। इस पुरस्कार की घोषणा एग्माँट ग्रुप की हाल में अजरबैज़ान के बाकू में हुए अधिवेशन के दौरान की गयी।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह मामला भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी)से प्राप्त खुफिया जानकारी से शुरू हुआ। इसके बाद एफआईयू-इंड द्वारा किए गए वित्तीय खुफिया विश्लेषण में लगभग 868 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी की कमाई उजागर हुई। इसे ठिकाने लगाने के लिए 5,000 से अधिक बैंक खातों तथा अनेक देशों में फैले जटिल क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन से जुड़े एक अत्यंत संगठित धन शोधन नेटवर्क का खुलासा हुआ।
इस जांच ने एग्मोंट सिक्योर वेब (ईएसडब्ल्यू) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। एफआईयू-भारत ने सीमा-पार क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन का पता लगाने और वैश्विक धन शोधन नेटवर्क की पहचान करने के लिए विभिन्न देशों की समकक्ष वित्तीय खुफिया इकाइयों के साथ वित्तीय खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान किया।
एफआईयू-भारत की परिचालन विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने व्यापक कार्रवाई शुरू की। इसके तहत 13 स्थानों पर तलाशी ली गई, 47 लाख रुपये नकद तथा लगभग 13.6 करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) जब्त की गई। साथ ही 8.67 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की गईं और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत दो अभियोजन शिकायतें (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की गईं हैं।
भारतीय एजेंसी को यह सम्मान वित्तीय खुफिया के क्षेत्र में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है और उन्नत परिचालन विश्लेषण, मजबूत घरेलू समन्वय तथा प्रभावी अंतरराष्ट्रीय खुफिया सूचना साझेदारी के माध्यम से देश के धन शोधन निरोधक एवं आतंकवाद के वित्तपोषण की रोकथाम (एएमएल/सीएफटी) ढांचे को और सुदृढ़ करने के प्रति एफआईयू-इंड की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
एफआईयू वित्त मंत्रालय की एजेंसी है।एफआईयू-भारत केंद्रीय जांच एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की निगरानी करती है और मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवाद के वित्तपोषण जैसे आर्थिक अपराधों को रोकने का काम करती है। यह सीधे वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक खुफिया परिषद (ईआईसी) को रिपोर्ट करता है।
एग्मोंट समूह का 'बेस्ट एग्मोंट केस अवॉर्ड' ऐसे उत्कृष्ट परिचालन मामलों को प्रदान किया जाता है, जो वित्तीय खुफिया विश्लेषण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और आतंकवाद के वित्तपोषण की रोकथाम में उल्लेखनीय योगदान को प्रदर्शित करते हैं।
एफआईयू का मामला एग्मोंट समूह के 182 सदस्य देशों/क्षेत्राधिकारों से प्राप्त प्रविष्टियों में से अंतिम दो मामलों में चयनित हुआ और पूर्ण अधिवेशन में इसे उपविजेता (रनर-अप) घोषित किया गया।
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