बैतूल , अगस्त 08 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा सहित चार सामाजिक संगठनों ने वर्ष 2027 की राष्ट्रीय जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सहित सभी जातियों की गणना कराने की मांग को लेकर सांसद प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने सांसद से संसद के मौजूदा सत्र में इस विषय को प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, भारत मुक्ति मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा और राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा की जिला इकाई ने सांसद दुर्गादास उइके के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि वर्ष 2027 की जनगणना के दोनों चरणों-हाउस लिस्टिंग और जनसंख्या गणना-में सभी जातियों की गणना अनिवार्य रूप से कराई जाए।
ज्ञापन में जनगणना प्रपत्रों में सभी जातियों के लिए अलग कॉलम जोड़ने तथा जनगणना से जुड़े ऑनलाइन पोर्टल, मोबाइल एप और डिजिटल प्रपत्रों में आवश्यक तकनीकी संशोधन करने की मांग भी की गई, ताकि जातिवार आंकड़ों का सटीक संकलन सुनिश्चित हो सके।
संगठनों ने मांग की कि जनगणना पूरी होने के बाद सभी जातियों के आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं। उनका कहना है कि इससे सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप योजनाओं के निर्माण, संसाधनों के न्यायसंगत वितरण तथा पिछड़े वर्गों से संबंधित नीतिगत निर्णय लेने में सुविधा होगी।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में संविधान की प्रस्तावना तथा अनुच्छेद 14, 15(4), 16(4), 38, 46 और 340 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि सटीक सामाजिक आंकड़ों के अभाव में कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन प्रभावित होता है।
ज्ञापन में कहा गया कि यदि वर्ष 2027 की जनगणना में सभी जातियों की गणना शामिल नहीं की गई तो विभिन्न समुदायों को अगले दस वर्षों तक आधिकारिक आंकड़ों की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। संगठनों ने सांसद से संसद के वर्तमान सत्र में इस मुद्दे को शून्यकाल, प्रश्नकाल अथवा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाने का अनुरोध किया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित