वाशिंगटन , सितंबर 5 -- अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वेनेजुएला के साथ तेल समझौते के संबंध में हितों के संभावित टकराव पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद ने कहा कि अमेरिकी करदाताओं के धन का इसमें निवेश करने से पहले इस बात का खुलासा किया जाये कि क्या श्री ट्रंप, उनका परिवार, राजनीतिक सहयोगी, प्रमुख दानदाता या व्यावसायिक सहयोगी इस सौदे से वित्तीय लाभ उठा सकते हैं।

"हाउस कमेटी ऑन ओवरसाइट एंड गवर्नमेंट रिफॉर्म" और "हाउस परमानेंट सिलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस" के वरिष्ठ सदस्य श्री कृष्णमूर्ति समझौते के बारे में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जिसमें संभावित लाभार्थियों की पहचान, करदाताओं के पैसे से मिलने वाले वित्तपोषण का उपयोग और प्रशासन द्वारा किये गये नैतिक सुरक्षा उपाय शामिल हैं। शनिवार कोश्री ट्रंप ने 28 अगस्त को इस सौदे की घोषणा करते हुए दावा किया था कि इससे संयुक्त राज्य अमेरिका को वेनेजुएला में "65 अरब बैरल से अधिक के प्रमाणित तेल भंडार के ज्यादा हिस्से पर नियंत्रण" मिल जायेगा।

व्हाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते में वेनेजुएला के व्यवसायी एलेजांद्रो बेटनकोर्ट के नेतृत्व वाली एक निजी कंपनी, नॉर्थ अमेरिकन ब्लू एनर्जी पार्टनर्स (एनएबीईपी) की मूल कंपनी में 35 प्रतिशत अमेरिकी हिस्सेदारी के साथ-साथ इसके तेल उत्पादन के एक हिस्से को खरीदने का तरजीही अधिकार भी शामिल है।

श्री ट्रंप को लिखे पत्र में श्री कृष्णमूर्ति ने कहा कि सीमित सार्वजनिक जानकारी, वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति के परस्पर विरोधी बयान और समझौते की वैधता से जुड़े सवाल वित्तीय हितों के संभावित टकराव को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं।

श्री कृष्णमूर्ति ने लिखा, "मुझे गंभीर चिंताएं हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि क्या आप, आपके परिवार के सदस्य, आपके राजनीतिक सहयोगी, या प्रमुख दानदाता इस व्यवस्था से वित्तीय रूप से लाभान्वित होने वाले हैं।" उन्होंने प्रशासन से वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में भारी अमेरिकी पूंजी लगाने से पहले अधिक पारदर्शिता प्रदान करने का आग्रह किया।

श्री कृष्णमूर्ति ने श्री बेटनकोर्ट से जुड़ी चिंताओं को भी उजागर किया, जो कथित तौर पर स्विट्जरलैंड, स्पेन और संयुक्त राज्य अमेरिका में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच का सामना कर चुके हैं।

मियामी की एक आपराधिक शिकायत में श्री बेटनकोर्ट की पहचान वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए के धन से जुड़ी एक अरब डॉलर की कथित साजिश में एक षड्यंत्रकारी के रूप में की गयी थी।

सांसद ने श्री ट्रंप के करीबी लोगों के साथ श्री बेटनकोर्ट के पिछले संपर्कों की ओर भी इशारा किया। श्री रूडी गिउलियानी, जिन्होंने उस समय ट्रंप के निजी वकील के रूप में काम किया था, ने न्याय विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत में श्री बेटनकोर्ट का प्रतिनिधित्व किया था। श्री बेटनकोर्ट को 2025 में स्पेन और स्विट्जरलैंड के अधिकारियों के अनुरोध पर ब्रिटेन में दो बार गिरफ्तार भी किया गया था।

पत्र में सौदे के अन्य संभावित लाभार्थियों के बारे में भी सवाल उठाये गये हैं, जिनमें तेल कारोबारी हैरी सार्जेंट-3 शामिल हैं, जो श्री ट्रंप से लंबे समय से जुड़े रिपब्लिकन दानदाता हैं और जिन्होंने कथित तौर पर वेनेजुएला पर प्रशासन को सलाह दी थी। श्री सार्जेंट पिछले महीने उस कंपनी को एक अज्ञात खरीदार को 300 मिलियन डॉलर में बेचने के लिए सहमत हो गये। इस कंपनी के माध्यम से उनकी एनएबीईपी में कुछ हिस्सेदारी थी।

श्री कृष्णमूर्ति का तर्क है कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि क्या श्री ट्रंप के साथ करीबी वित्तीय या राजनीतिक संबंध रखने वाले व्यक्ति इस समझौते से लाभ उठा सकते हैं। यदि श्री ट्रंप से जुड़ा कोई भी व्यक्ति या संस्था वेनेजुएला के तेल के विकास, वित्तपोषण, शोधन, परिवहन, बिक्री या निर्यात से - या इस समझौते की वजह से अमेरिकी सरकार के ठेके, वित्तपोषण, लाइसेंस या अन्य लाभ प्राप्त करने वाली कंपनियों से लाभ उठाने वाली है - तो अमेरिकी करदाताओं और अमेरिकी सरकार के साधनों को लगाने से पहले जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है।"श्री कृष्णमूर्ति ने इसके अलावा पूछा है कि इस समझौते की घोषणा के बाद श्री ट्रंप या उनके परिवार से जुड़े व्यक्तियों को वेनेजुएला की तेल संपत्तियों या भाग लेने वाली कंपनियों में हित हासिल करने से रोकने के लिए क्या उपाय किये जायेंगे।

श्री कृष्णमूर्ति ने कहा कि अमेरिकी करदाताओं और अमेरिकी सरकार के साधनों को लगाने से पहले प्रशासन को इन सवालों के जवाब देने चाहिए। उन्होंने इस मांग को वेनेजुएला सौदे के आसपास पारदर्शिता और हितों के संभावित टकराव की व्यापक परीक्षा के रूप में प्रस्तुत किया।

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