रायसेन , मई 28 -- विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ सांची स्थित चैतियगिरी विहार मंदिर में सुरक्षित भगवान बुद्ध के परम शिष्यों अर्हन्त सारिपुत्र और अर्हन्त महामोग्गलान के पवित्र अस्थि कलश आज विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बीच मंगोलिया भेजे गए।
महाबोधि सोसायटी श्रीलंका के प्रमुख वानगल उपतित्स्स नायक थेरो ने विशेष पूजा-अर्चना के बाद भारत सरकार के राष्ट्रीय संग्रहालय से आए अधिकारियों को पवित्र अवशेष सौंपे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत की अमूल्य विरासत पूरी सुरक्षा के साथ मंगोलिया भेजी जा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन पवित्र अवशेषों के मंगोलिया पहुंचने से भारत और मंगोलिया के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के निर्देश पर आयोजित प्रक्रिया में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा तथा भारत सरकार के संस्कृति विभाग के निदेशक यश सक्सेना सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।
पवित्र अवशेषों को सांची से भोपाल और वहां से हवाई मार्ग द्वारा दिल्ली भेजा गया। राष्ट्रीय संग्रहालय में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इन्हें 29 मई को मंगोलिया रवाना किया जाएगा। मंगोलिया के गंडन तेगचेनलिंग मठ में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ इन्हें रखा जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 जून को पवित्र अवशेष पुनः दिल्ली लौटेंगे और 11 जून को उन्हें सांची स्थित चैतियगिरी विहार मंदिर में पुनः स्थापित किया जाएगा।
पूरी प्रक्रिया के दौरान पवित्र अवशेषों का अभिलेखीकरण, वीडियोग्राफी और पंचनामा भी तैयार किया गया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस प्रकार की परंपरा प्रारंभ हुई है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के अनुयायी दुनिया के अनेक देशों में हैं और भारत सरकार पवित्र अवशेषों को पूरी सुरक्षा तथा विधिवत प्रक्रिया के साथ विदेश भेजती है और वापस लाकर सम्मानपूर्वक स्थापित करती है।
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