सहारनपुर , जून 23 -- उत्तर प्रदेश का सहारनपुर फल पट्टी के रूप में और उत्कृष्ट किस्म की बेहद जायकेदार आम की पैदावार के लिए विख्यात है और यह जनपद दो उत्पादों वुड कार्विंग और फल खासकर आम के उत्पादन और निर्यात के लिए राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल है।

जिला उद्यान अधिकारी गमपाल सिंह ने मंगलवार को बताया कि जनपद में आम की पैदावार का क्षेत्रफल 27900 हेक्टेयर है और आम का वार्षिक उत्पादन अनुमानतः 5 लाख 2 हजार 200 मीट्रिक टन है। यहां आम की सबसे ज्यादा पसंददीदा और निर्यात होने वाली प्रजातियों में दशहरी, चौसा, लंगड़ा और रामकेला शामिल है।

सहारनपुर मंड़ी समिति के उपनिदेशक देवेंद्र कुमार वर्मा ने आज बताया कि पिछली बार विभिन्न कारणों से आम का ज्यादा निर्यात नहीं हो पाया था। इस बार हमारी तैयारियां और निर्यात की उम्मीद बढ़ी हुई है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सबसे पहले सहारनपुर को आम निर्यात के लिए अपनी सूची में शामिल किया था और यहां पर जो मैंगो पैक हाउस है उसमें जापान की वैपर हीट ट्रीटमेंट लगी हुई है और आधुनिक हाट वाटर ट्रीटमेंट हैं और आम की ग्रेडिंग लाइन मशीन इटली की है। यह सुविधा पूरी उत्तर प्रदेश में केवल यहीं पर है। अब उत्तर प्रदेश में सहारनपुर के अलावा मैंगो पैक हाउस दादरी, बनारस, गोरखपुर और अमरोहा में भी सुविधा हो गई है।

उन्होंने बताया कि लखनऊ और सहारनपुर के तापमान में दो डिग्री सेल्सियस का अंतर होने के कारण लखनऊ में आम जल्दी पककर तैयार हो जाता है जबकि सहारनपुर में निर्यात के लिए निर्धारित आकार और वजन अभी तैयार होने में थोड़ा समय लगेगा। निर्यात के मानकों के मुताबिक आम का वजन 300 से 350 ग्राम होना अनिवार्य है।

सहारनपुर मंड़ी परिसर में मैंगो पैक हाउस से प्रोसेस होकर यानि आम की धुलाई, ग्रेडिंग कर वेपर हीट ट्रीटमेंट से गुजारा जाता है। इससे आम संक्रमणमुक्त हो जाता है। मंड़ी सचिव सहारनपुर देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अभी खरीददारी के लिए नेपाल के निर्यातक पहुंचे हैं पर अभी निर्यात के लिए आम तैयार होने में कम से कम एक पखवाड़ा और लगेगा। यहां से लंगड़ा, चौसा और दशहरी एवं आम्रपाली आम यूरोप, जापान को भी जाता है। निर्यातकों को आम के निर्यात पर 25 फीसदी का अनुदान भी मिलता है। सहारनपुर में आम के निर्यातकों की संख्या करीब एक दर्जन है।

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