सहारनपुर , जुलाई 23 -- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के सामने लाइन लॉस बड़ी चुनौती बना हुआ है। विद्युत विभाग के अनुसार जिले को उपलब्ध कराई जा रही कुल बिजली का लगभग 29 प्रतिशत हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही तकनीकी एवं वितरण हानि में नष्ट हो जाता है।
मुख्य अभियंता राजेश कुमार ने गुरुवार को बताया कि सहारनपुर को प्रतिमाह 628.772 मेगा यूनिट विद्युत आपूर्ति प्राप्त होती है, जबकि उपभोक्ताओं तक केवल 446.902 मेगा यूनिट बिजली ही पहुंच पाती है। इस प्रकार 28.92 प्रतिशत बिजली लाइन लॉस के कारण नष्ट हो जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष यह हानि 30 से 32 प्रतिशत के बीच थी और विभाग का लक्ष्य इसे घटाकर 20 प्रतिशत तक लाना है।
उन्होंने बताया कि पुराने ट्रांसफार्मर, जर्जर विद्युत लाइनें, कंडक्टर, इंसुलेटर तथा अन्य उपकरण तकनीकी हानि के प्रमुख कारण हैं। नगर क्षेत्र में अपेक्षाकृत आधुनिक विद्युत अवसंरचना होने से लाइन लॉस 8 से 11 प्रतिशत के बीच है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 वर्ष पुराने ट्रांसफार्मर और जर्जर नेटवर्क के कारण हानि कहीं अधिक है।
मुख्य अभियंता के अनुसार सहारनपुर मंडल के मुजफ्फरनगर जनपद में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। वहां विभाग को 921.826 मेगा यूनिट बिजली मिलती है, जिसमें से 683.641 मेगा यूनिट उपभोक्ताओं तक पहुंचती है और लाइन लॉस 25.84 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक रविश गुप्ता के अनुसार निगम क्षेत्र में सबसे कम लाइन लॉस मेरठ द्वितीय जोन में 8.16 प्रतिशत है, जबकि सबसे अधिक गाजियाबाद द्वितीय में 30.25 प्रतिशत तथा गजरौला में 30.11 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इसके अलावा बुलंदशहर में 28.26 प्रतिशत, गाजियाबाद प्रथम में 26.86 प्रतिशत, मेरठ प्रथम में 22.02 प्रतिशत, मुरादाबाद में 18.96 प्रतिशत, नोएडा में 15.70 प्रतिशत तथा गाजियाबाद तृतीय में 15.05 प्रतिशत लाइन लॉस है।
विद्युत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी वितरण व्यवस्था के आधुनिकीकरण, जर्जर लाइनों के प्रतिस्थापन तथा पुराने ट्रांसफार्मरों को बदलने से लाइन लॉस में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। हालांकि विभाग का दावा है कि जनपद में पर्याप्त विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं का कहना है कि निर्धारित रोस्टर के अनुरूप भी उन्हें नियमित बिजली नहीं मिल पा रही है। इससे ग्रामीण विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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