सहारनपुर , मार्च 07 -- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कृषि भूमि दर्शाकर कराए गए बैनामों से जुड़े स्टाम्प वादों में जिला मजिस्ट्रेट मनीष बंसल ने पिछली फरवरी के दौरान कार्रवाई करते हुए तीन करोड़ 32 लाख 18 हजार 529 रुपये का अर्थदंड आरोपित किया है।
जिला मजिस्ट्रेट मनीष बंसल ने कहा कि राजस्व को होने वाली हानि किसी भी स्थिति में क्षम्य नहीं होगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि स्टाम्प से जुड़े कुल 27 वादों का निस्तारण करते हुए यह अर्थदंड लगाया गया है।
उन्होंने बताया कि ग्राम गंदेवड़ा, परगना हरौड़ा, तहसील एवं जिला सहारनपुर से संबंधित सात मामलों में पक्षकारों द्वारा संपत्ति को कृषि भूमि दर्शाकर बैनामा पंजीकृत कराया गया था, जबकि जांच में उक्त संपत्ति सेगमेंट पर स्थित अकृषिक भूमि पाई गई।
इसी प्रकार ग्राम शेखूपुर उर्फ छाछरेकी, तहसील व जिला सहारनपुर से जुड़े तीन मामलों में मौके पर कृषि कार्य नहीं पाया गया। जांच में पाया गया कि वहां प्लॉटिंग की जा रही है, जहां ईंटों से निशानदेही और मिट्टी का भराव कर रास्ते बनाए गए हैं। आसपास आवासीय मकान और प्लॉटिंग की गतिविधियां भी मौजूद पाई गईं, जबकि दस्तावेजों में भूमि को कृषि बताया गया था।
ग्राम खुशहालीपुर, परगना मुजफ्फराबाद, तहसील बेहट से जुड़े दो मामलों में पक्षकारों ने सर्किल रेट से कम मूल्यांकन पर बैनामा पंजीकरण के लिए दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। जांच में खसरा संख्या 459/2 तहसीलदार द्वारा जारी सूची में आबादी क्षेत्र में स्थित पाया गया, जबकि दस्तावेज में इसे कृषि भूमि दर्शाया गया था।
ग्राम जंधेड़ी, परगना व तहसील रामपुर मनिहारान से जुड़े दो मामलों (सरकार बनाम संस्कृति चौधरी) में भी संपत्ति को कृषि भूमि दर्शाया गया, जबकि जांच में पाया गया कि उक्त भूमि सहारनपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है और 200 मीटर की परिधि में अकृषक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसी तरह ग्राम देवबंद बैरून हदूद से जुड़े एक मामले में भी संपत्ति को दस्तावेजों में कृषि भूमि दर्शाया गया था, जबकि जांच के दौरान वह अकृषिक भूमि पाई गई। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राजस्व की हानि करने वाले ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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