सहारनपुर , सितंबर 01 -- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग ब्यास केंद्र में मंगलवार को दो दिवसीय विशाल सत्संग समागम शुरू हुआ। समागम के पहले दिन हजूर जसदीप सिंह गिल ने सवाल-जवाब सत्र में संगत के आध्यात्मिक और व्यावहारिक प्रश्नों के सरल एवं सहज अंदाज में उत्तर दिए।
सुबह साढ़े नौ बजे शुरू हुए कार्यक्रम का आरंभ 'गुरु मोहे रूप अपना दिखाओ' शब्द गायन से हुआ। इसके बाद 'दुख भंजन तेरा नाम' बाणी के भावों की व्याख्या करते हुए नाम सिमरन और नाम की कमाई को आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग बताया गया।
हजूर जसदीप सिंह गिल ने गुरु नानक के कथन 'नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात' का उल्लेख करते हुए कहा कि नाम का सिमरन ऐसा शाश्वत और पवित्र नशा है, जो व्यक्ति के मन को स्थायी रूप से तृप्त करता है। उन्होंने कहा कि यह आत्मिक आनंद दिन-रात बना रहता है और इसके लिए किसी बाहरी साधन की आवश्यकता नहीं होती।
सत्संग में आधुनिक जीवन का उदाहरण देते हुए समझाया गया कि जिस प्रकार मोबाइल फोन की मेमोरी पूरी हो जाने पर उसमें नई फाइल या वीडियो के लिए जगह नहीं बचती, उसी प्रकार सांसारिक मोह-माया, काम, क्रोध और लोभ से भरे मन में परमात्मा का ध्यान नहीं टिक सकता। इसलिए नाम सिमरन और सेवा के माध्यम से मन को विकारों से मुक्त करना आवश्यक है।
सेवा के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सेवा दिनों या घंटों की गिनती के लिए नहीं, बल्कि अपने भीतर के 'मैं' और अहंकार को समाप्त कर विनम्रता विकसित करने के लिए की जाती है। सवाल-जवाब सत्र में क्रोध के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि जब हमारी अत्यधिक आशाएं और इच्छाएं पूरी नहीं होतीं तो गुस्सा पैदा होता है। यदि हम दूसरों से अपेक्षाएं सीमित रखें और यह विचार करें कि गुस्से में किया गया व्यवहार यदि हमारे साथ हो तो कैसा लगेगा, तो क्रोध पर नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गुस्सा तन, मन और धन तीनों के लिए नुकसानदायक है।
एक श्रद्धालु द्वारा वास्तविक नशे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दुनियावी नशे क्षणिक होते हैं, जबकि नाम का नशा आत्मा को स्थायी शांति और सुरूर प्रदान करता है। डर और काले जादू से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि अंधेरा और वहम मन के भ्रम हैं। जब परमात्मा पर विश्वास हो तो डरने की आवश्यकता नहीं है। सतगुरु जीव को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
समागम में उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भारी भीड़ के बावजूद सत्संग परिसर और आसपास व्यवस्थाएं अनुशासित एवं सुचारु रहीं। हजारों सेवादार पिछले कई दिनों से व्यवस्था में जुटे हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित