नैनीताल , मार्च 13 -- सहायक अध्यापक एलटी और प्रवक्ताओं की नियमितीकरण से पहले की सेवाओं को नियमित सेवा में जोड़ने से संबद्ध महत्वपूर्ण मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए प्रकरण को बृहत पीठ (लार्जर बेंच) को भेज दिया है। साथ ही अदालत ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है।
मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में हुई। जहां सत्य प्रकाश शर्मा सहित कई शिक्षकों की ओर से दायर कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनकी नियुक्ति वर्ष 1990 से 1993 के बीच हुई और वर्ष 2002 में उन्हें नियमित किया गया। उनका तर्क है कि नियमित होने से पहले की उनकी सेवाओं को भी नियमित सेवा में जोड़ा जाना चाहिए, ताकि उन्हें सेवा लाभ मिल सके। याचिकाकर्ताओं के अनुसार उनके नियुक्ति पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि 07 अगस्त 1993 से पूर्व नियुक्त कर्मचारियों की पूर्व सेवाओं को नियमित सेवा में जोड़ा जाएगा।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि याचिकाकर्ता वर्ष 2018 की सेवानिवृत्ति नियमावली के दायरे में नहीं आते, इसलिए उनकी पूर्व सेवाओं को नियमित सेवा में शामिल नहीं किया जा सकता।
इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उन पर 2018 की नियमावली लागू नहीं होती, बल्कि उनके मामले में उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्ति नियमावली 1961 लागू होती है। इसलिए नियमितीकरण से पहले की सेवाओं को भी नियमित सेवा में जोड़ते हुए उन्हें संबंधित लाभ दिए जाना चाहिए।
चूंकि यह मुद्दा पहले से खंडपीठ में भी विचाराधीन है, इसलिए एकलपीठ ने इस मामले को भी विस्तृत सुनवाई के लिए बड़ी पीठ के समक्ष भेज दिया है। अब इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अंतिम निर्णय बड़ी पीठ द्वारा किया जाएगा, जिसका असर राज्य के कई शिक्षकों पर पड़ सकता है।
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