जगदलपुर , अक्टूबर 09 -- छत्तीसगढ़ में बस्तर जिले के जगदलपुर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकारिता समीक्षा सम्मेलन में आगामी पांच वर्षों के लिए सहकारिता क्षेत्र की रणनीतिक कार्ययोजना, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के विस्तार, सहकारी बैंकों के आधुनिकीकरण और जिला स्तर पर सफल सहकारी मॉडल को अपनाने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

'सहकार से समृद्धि' अभियान के अंतर्गत आयोजित सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी ने आज कहा कि आगामी दो से तीन वर्षों में देशभर में लगभग 95 हजार नई पैक्स समितियों के गठन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी गतिविधियों के विस्तार के साथ जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

डॉ. भूटानी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से स्थानीय आवश्यकताओं तथा प्राथमिकताओं के अनुरूप व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार कर उसका शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा विकसित किए जा रहे साझा कोर बैंकिंग समाधान मंच, साइबर सुरक्षा, पैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण और लेखा परीक्षण संबंधी कार्यों के समयबद्ध निराकरण पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण व्यवस्था विकसित करने और डेयरी क्षेत्र को सहकारिता से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने की आवश्यकता भी बताई।

सम्मेलन के प्रारंभिक सत्र में नाबार्ड और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ने अगले पांच वर्षों के दौरान सहकारिता क्षेत्र को उपलब्ध कराए जाने वाले वित्तीय सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की। नाबार्ड के अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र का संचालन पंजाब के अतिरिक्त सचिव ने किया। इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित लक्ष्यों, प्रस्तावित योजनाओं और वित्तीय सहायता के प्रावधानों की समीक्षा की गई।

कृषि क्षेत्र में पैक्स समितियों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित एक अन्य सत्र में भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको), इफको-एमसी, कृषक भारती सहकारी लिमिटेड (कृभको) और आईपीएल के प्रतिनिधियों ने प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान किसानों तक सीधे उर्वरकों की आपूर्ति, नई समितियों के गठन और कीटनाशक व्यापार में पैक्स की भूमिका बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

सम्मेलन में सहकारिता के क्षेत्र में जिला स्तर पर अपनाए गए सफल प्रयोगों को भी साझा किया गया। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, बिहार, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा पुडुचेरी के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के उत्कृष्ट सहकारी मॉडल प्रस्तुत किए।

आंध्र प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता तथा गुजरात के सहकारी समितियों के पंजीयक के संचालन में आयोजित इस सत्र में प्रत्येक राज्य के दो उत्कृष्ट जिलों में अपनाई गई कार्यप्रणालियों और उनके परिणामों पर विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन के अंतर्गत प्रतिभागियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के समन्वय से पैक्स समितियों, लघु वनोपज सहकारी समितियों और जनजातीय सहकारी समितियों का अध्ययन भ्रमण भी आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर संचालित सहकारी गतिविधियों और उनके व्यावहारिक स्वरूप से विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को परिचित कराना था।

केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. भूटानी ने घोषणा की कि राष्ट्रीय सहकारिता समीक्षा सम्मेलन की अगली बैठक जनवरी 2027 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित की जाएगी।

इस अवसर पर तमिलनाडु की अपर मुख्य सचिव सहकारिता पी. अमुधा, केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पंकज बंसल, संयुक्त सचिव सिद्धार्थ जैन, छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, सहकारिता आयुक्त एवं सहकारी संस्थाओं के पंजीयक रमेश कुमार शर्मा सहित विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिव, पंजीयक और सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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