अलवर , अगस्त 27 -- राजस्थान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक और सहकारिता आंदोलन के प्रमुख पुरोधा महेंद्र शास्त्री का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे।
श्री शास्त्री काफी समय से अस्वस्थ थे। अलवर में मोती डूंगरी में स्थित अपने निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से अलवर के राजनीतिक, सामाजिक और सहकारिता क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। श्री शास्त्री का भरापूरा परिवार है।
श्री शास्त्री का जन्म 27 अप्रैल 1932 को अलवर के ग्राम बम्बोरा में हुआ था। उन्होंने बीए, एलएलबी, शास्त्री और साहित्यरत्न की शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1985 में आठवीं राजस्थान विधानसभा के चुनाव में लोकदल पार्टी से मुंडावर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और वर्ष 1990 तक विधायक रहे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और पार्टी में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।
श्री शास्त्री की पहचान सिर्फ राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि सहकारिता आंदोलन के मजबूत स्तंभ के रूप में भी रही। वह राजस्थान राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष, अलवर केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष, कृषि उपज मंडी समिति अलवर के अध्यक्ष, क्रय-विक्रय सहकारी समिति के अध्यक्ष और पंचायत समिति मुंडावर के प्रधान जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। सहकारिता क्षेत्र में उनके योगदान के कारण उन्हें इस आंदोलन के प्रमुख अगुवा नेताओं में गिना जाता था।
उनके जीवन का संघर्ष भी बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। उनके जीवन पर लिखे गए संस्मरण में उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा को 'शिव-जटाओं सी उलझी जीवन-गाथा' बताया गया है। साहित्य से भी उनका गहरा जुड़ाव था। उनकी काव्य कृति 'गा ले कोई गीत' प्रकाशित हुई, जबकि 'यादों की महक' संस्मरण के रूप में सामने आई। इसके अलावा उनकी दो काव्य कृतियां और तीन गद्य पुस्तकें अप्रकाशित बताई गई हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित