, April 2 -- सपा की रुचि वीरा ने कहा कि यह विधेयक सीएपीएफ अधिकारियों और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के बीच टकराव पैदा करेगा। इस विधेयक में जवानों के लिए कोई सुविधा बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं हैं।

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के चंद्रशेखर ने कहा कि जवान दुश्मन से ज्यादा अपने सिस्टम से ज्यादा लड़ रहे हैं। सरकार को बताना चाहिए कि सीएपीएफ के जवानों में आत्महत्या और नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति बढ़ क्यों रही है। इस विधेयक के लागू होने के बाद अधिकारियों जवानों की पदोन्नति की क्या स्थिति होगी। सरकार को बताना चाहिए कि यह विधेयक इस बल के अधिकारियों-जवानों के हितों की रक्षा कैसे करेगी।

निर्दलीय अब्दुल रशीद शेख ने कहा कि सीएपीएफ अधिकारी इस बात से चिंतित हैं कि इस विधेयक के माध्यम से उन्हें क्या मिलने वाला है। सीमा सुरक्षा बल के जवान कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं, सरकार को जवानों की तकलीफों को समझना और जवानों का ध्यान रखना चाहिए।

कांग्रेस के वरुण चौधरी ने कहा कि यह विधेयक अधिकारियों की पदोन्नति को रोकने वाला, उनका मनोबल गिराने वाला है। पूरी दुनिया में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलेगा जहां सरकार अपने ही सशस्त्र बलाें के खिलाफ लड़ती है और हारने के बाद ऐसा विधेयक लाने का काम करती है। सरकार इसी तरह अग्निवीर योजना लायी जो देश के युवाओं को बड़ा नुकसान हुआ है। अब यह विधेयक लायी है। यह बिल्कुल गलत है,देश के लिए देश के लिए सुरक्षा ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि जब से भाजपा की सरकार बनी है एक भी अधिकारी की पदोन्नति हुई है। सरकार न तो अधिकारियों की संख्या बढ़ा रही है और न ही अधिकारियों की पदोन्नति कर रही है। इस विधेयक के बारे में राज्यों से नहीं पूछा गया। किस अध्ययन के आधार पर इस विधेयक में पदोन्नति के प्रावधान किये गये हैं। पहले अग्निवीर की योजना लाकर फौज को कमजोर किया गया और अब यह विधेयक लाकर सशस्त्र बलों को कमजोर किया जा रहा है।

सपा के राजीव राय ने कहा कि यह सरकार का अहंकार या जिद है कि जो उन्हें सुविधाजनक नहीं लगता है, उसे बदलने की कोशिश करते हैं। इस सदन से लेकर सीमा की सुरक्षा तक के कार्य में सशस्त्र बल के जवान और अधिकारी लगे हुए हैं। सशस्त्र बलों में नौ लाख से अधिक जवान और 13 हजार अधिकारियों के मनोबल को तोड़ने का कार्य क्यों यह सरकार कर रही है। सीएपीएफ के अधिकारी 15-15 वर्षों तक एक ही पद पर बने रहते हैं, सरकार को इस का गहन चिंतन करना चाहिए।

कांग्रेस के बलवंत बसवंत वानखेड़े ने कहा कि यह विधेयक सीएपीएफ के जवानों के अधिकार के खिलाफ है। विधेयक में स्पष्टता नहीं है, इसमें सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है। यह विधेयक बहुत जल्दबाजी में लाया गया है।

सपा के अवधेश प्रसाद ने कहा कि यह विधेयक हमारे देश के लाखों जवानों और अधिकारियों के साथ अन्याय है। यह विधेयक उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना है। यह न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।

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