नयी दिल्ली , अक्टूबर 19 -- संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्ष से चर्चा के लिए सरकार की ओर से किये गये प्रयासों का हवाला दिया और कांग्रेस से विधेयक पर रचनात्मक सहयोग करने की अपील की है।

श्री रिजिजू ने सोमवार को श्री खरगे को लिखे पत्र में कहा कि सरकार परिसीमन संशोधन विधेयक पर चर्चा कर उसे पारित कराने के लिए लगातार विपक्ष का समर्थन और सहयोग मांगती रही है। इसके लिए उन्होंने श्री खरगे को गत 16 मार्च, 26 मार्च और 12 अप्रैल को भी इस संबंध में पत्र लिखे थे। इसके अलावा उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भी बातचीत कर विधेयक पर समर्थन और सहयोग मांगा था। मानसून सत्र के दौरान उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की और उनसे सहयोग मांगा था।

गौरतलब है कि श्री खरगे ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर संसद में विचार किये जाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी, जिसके जवाब में श्री रिजिजू ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों से कई बार संपर्क कर चुकी है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कांग्रेस ने चर्चा के लिए तारीखें नहीं दीं, जिसके बाद सरकार ने अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क किया। इस संबंध में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक), समाजवादी पार्टी (सपा), वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), एआईएमआईएम और बीजू जनता दल (बीजद) सहित विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया गया, ताकि संवाद को आगे बढ़ाया जा सके और प्रस्तावित विधेयक पर व्यापक सहमति बन सके।

श्री रिजिजू ने पत्र में लिखा कि जब सरकार संवाद के लिए लगातार प्रयास कर चुकी है, तो बार-बार परामर्श की मांग क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों से अपेक्षा है कि वे पहले से किये गये विचार-विमर्श को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर रचनात्मक सहयोग करें, न कि पहले की मांग ही दोहराते रहें।

उन्होंने कहा कि सरकार इन प्रयासों के माध्यम से परामर्श और रचनात्मक संसदीय संवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर चुकी है। सरकार संसदीय लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है और संसद के प्रभावी कामकाज के माध्यम से सार्थक संवाद को बढ़ावा देना चाहती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श में सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी को महत्व दिया जाता है।

श्री रिजिजू ने आशा व्यक्त किया कि कांग्रेस रचनात्मक भूमिका निभायेगी और भविष्य के महत्वपूर्ण विधेयकों में बाधा नहीं डालेगी।

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