नयी दिल्ली , मार्च 31 -- रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 14-15 मई को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नयी दिल्ली आयेंगे। रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने रूस की समाचार एजेंसी तास को यह जानकारी दी।

भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन से इतर श्री लावरोव विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य अधिकारियों के साथ भी अलग से बैठकें करेंगे।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रूस के उप विदेश मंत्री रुडेंको के साथ 30 मार्च को एक वार्ता की थी। इस वार्ता (परामर्श) के दौरान, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

दोनों ने दिसंबर 2025 में नयी दिल्ली में आयोजित 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के निर्णयों को लागू करने की प्रगति का भी आकलन किया। अपनी यात्रा के दौरान, श्री रुडेंको ने विदेश मंत्री से भी मुलाकात की। परामर्श का पिछला दौर मार्च 2025 में मास्को में हुआ था।

एक संबंधित घटनाक्रम में, व्लादिवोस्तोक में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने रूसी विज्ञान अकादमी की सुदूर पूर्वी शाखा के सहयोग से एक नयी भारत-रूस चर्चा श्रृंखला शुरू की। राजदूत (सेवानिवृत्त) मंजीव सिंह पुरी ने 'द आर्क ऑफ पार्टनरशिप' पर मुख्य भाषण दिया, जिसमें आर्कटिक जुड़ाव, कनेक्टिविटी, नागरिकों के आवागमन और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को कवर करने वाली चर्चाएं शामिल थीं।

रूस और भारत के करीबी द्विपक्षीय संबंध मजबूत होते जा रहे हैं। 23 मार्च को 'रूस और भारत: द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक नए एजेंडे की ओर' विषय पर दूसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में एक वीडियो संबोधन में श्री लावरोव ने भारत के साथ निरंतर उच्च स्तरीय राजनयिक जुड़ाव पर प्रकाश डाला था।

इस संबोधन में श्री लावरोव ने दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के परिणामों का भी उल्लेख किया, जिसमें दोनों पक्षों के बीच नीतिगत जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किये गये थे।

रूसी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के मजबूत आर्थिक संबंधों पर जोर देते हुए कहा था कि द्विपक्षीय व्यापार 2025 में लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसे 2030 तक 100 अरब डॉलर तक हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच 96 प्रतिशत व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं में किया जाता है।भारत ने एक जनवरी को ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की थी। अध्यक्षता के लोगो, विषय (थीम) और वेबसाइट के अनावरण के अवसर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जोर दिया था कि भारत का लक्ष्य वैश्विक कल्याण के लिए ब्रिक्स की क्षमता का लाभ उठाना है। उन्होंने कहा कि भारत के दृष्टिकोण के अनुसार ब्रिक्स के लिए चार स्तंभ सबसे महत्वपूर्ण हैं- लचीलापन (आपूर्ति श्रृंखला, स्वास्थ्य), नवाचार (डिजिटल बुनियादी ढांचा, एआई, फिनटेक), सहयोग (सुधारित बहुपक्षवाद, भागीदारी), और स्थिरता (हरित वित्त, ऊर्जा संक्रमण)।

उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब सहित ग्यारह ब्रिक्स देशों की कुल अनुमानित जनसंख्या 3.9 अरब है, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 48 प्रतिशत है।

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