अलवर , अक्टूबर 17 -- राजस्थान में अलवर जिले के सरिस्का बाघ परियोजना से वन्यजीव प्रेमियों के लिए उस समय खुशखबरी सामने आयी जब बाघिन एसटी-26 पहली बार अपने दो शावकों के साथ नजर आयी।

दोनों शावकों के साथ बाघिन की तस्वीरें क्षेत्र में लगाये गये कैमरे में कैद हुई हैं। इनके दिखने के साथ ही सरिस्का के जंगल में बाघों की नयी पीढ़ी की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। वन विभाग के अनुसार, दोनों शावक स्वस्थ और चुस्त दिखाई दे रहे हैं।

वन विभाग के सूत्रों ने शनिवार को बताया कि एसटी-26 बाघिन एसटी-14 की संतान है और सरिस्का में ही जन्मी है। वर्तमान में इसका क्षेत्र तालवृक्ष एवं अकबरपुर रेंज में है। सरिस्का में जन्मी बाघिन का सफल प्रजनन अभयारण्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बाघों की आबादी को मजबूती मिलने के साथ ही भविष्य में बाघ संरक्षण की उम्मीदें भी बढ़ी हैं।

बाघिन और उसके दोनों शावकों के दिखने के बाद वन विभाग ने संबंधित रेंज के फील्ड कर्मियों को नियमित गश्त और कैमरा ट्रैप के जरिए सघन निगरानी के निर्देश दिये हैं। शावकों की सुरक्षा को देखते हुए उनके प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप और अन्य व्यवधानों को न्यूनतम रखने पर जोर दिया जा रहा है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

वन विभाग ने पर्यटकों, ग्रामीणों और आमजन से वन्यजीवों से उचित दूरी बनाए रखने और पर्यटन संबंधी नियमों का पालन करने का आग्रह किया है।

सरिस्का के जंगल में एसटी-26 के दो शावकों के होने से वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से अहम घटनाक्रम है। अब वन विभाग की प्राथमिकता बाघिन और दोनों शावकों की सुरक्षित निगरानी और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाये रखना है। फिलहाल सरिस्का में कुल 58 बाघ हैं। इनमें 11 नर, 17 मादा और 30 शावक हैं।

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